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तमिलनाडु की सियासत में इस वक्त एक ऐसी ‘सुनहरी’ हलचल मची है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जहाँ सुपरस्टार से राजनेता बने थलपति विजय और उनकी पार्टी ‘तमिल वेत्री कड़गम’ (TVK) ने 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है जिसने सीधे तौर पर आम जनता की सबसे बड़ी भावनात्मक और आर्थिक जरूरत पर प्रहार किया है। विजय ने अपनी चुनावी रैली में यह क्रांतिकारी घोषणा की है कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो राज्य की प्रत्येक गरीब दुल्हन को शादी के अवसर पर 8 ग्राम शुद्ध सोना सरकार की ओर से भेंट किया जाएगा और साथ ही घर में जन्म लेने वाले हर नवजात शिशु को सोने की अंगूठी दी जाएगी, यह घोषणा केवल एक चुनावी वादा नहीं है बल्कि तमिलनाडु के उस गहरे सांस्कृतिक ताने-बाने से जुड़ी है जहाँ सोने को केवल एक धातु नहीं बल्कि ‘महालक्ष्मी‘ का रूप और परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा का सबसे बड़ा स्तंभ माना जाता है। अगर हम आंकड़ों के नजरिए से देखें तो यह हकीकत चौंकाने वाली है कि अकेले तमिलनाडु के घरों में भारत के कुल घरेलू सोने का लगभग 28% हिस्सा मौजूद है, जो वजन के हिसाब से करीब 6,720 टन बैठता है—यह मात्रा दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका के सरकारी स्वर्ण भंडार (करीब 8,000 टन) के लगभग बराबर है और जर्मनी, इटली व रूस जैसे देशों के राष्ट्रीय रिजर्व से तो कहीं ज्यादा है, जो यह साबित करता है कि यहाँ के आम परिवारों की तिजोरियां किसी भी विकसित देश के केंद्रीय बैंक को टक्कर दे सकती हैं। इस दीवानगी की जड़ें सदियों पुराने तमिल साहित्य में मिलती हैं, जहाँ महाकाव्य ‘शिलप्पदीगारम’ की पूरी कहानी ही एक सोने की पायल के इर्द-गिर्द बुनी गई है, यही कारण है कि आज भी चेन्नई की मिंट रोड से लेकर छोटे गांवों तक सेलवी जैसी लाखों माताएं अपनी पूरी उम्र की कमाई सिर्फ इसलिए बचाती हैं ताकि बेटी को विदा करते समय कम से कम 10-20 तोला सोना दे सकें, क्योंकि इसके बिना समाज में सम्मान से जीना मुश्किल माना जाता है। थलपति विजय ने इसी नब्ज को पहचानते हुए 23 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान से पहले अपनी बिसात बिछाई है, जो सीधे तौर पर उन परिवारों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है जो बढ़ती महंगाई में सोने की कीमतों से त्रस्त हैं। जहाँ अन्य राज्यों में शराब और कैश की बरामदगी सुर्खियां बनती हैं, वहीं तमिलनाडु में चुनाव आयोग को सबसे ज्यादा सोना जब्त करना पड़ता है क्योंकि यहाँ सत्ता का रास्ता अक्सर पीली धातु की चमक से होकर ही गुजरता है। अब देखना यह होगा कि 4 मई को जब नतीजे आएंगे, तो क्या विजय का यह ‘सुनहरा वादा’ उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचा पाएगा या फिर राज्य की राजनीति कोई नया मोड़ लेगी, लेकिन इतना तय है कि इस खबर ने विपक्षी खेमों में खलबली जरूर मचा दी है।

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