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नई दिल्ली/ वरिष्ठ पत्रकार से राजनेता बने हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर राज्यसभा के उपसभापति चुन लिए गए हैं। 17 अप्रैल, 2026 को उच्च सदन में हुई निर्वाचन प्रक्रिया के बाद उनके नाम पर मुहर लगी। सदन में उनके अनुभव, निष्पक्षता और शालीन व्यवहार को देखते हुए सत्ता पक्ष और सहयोगी दलों ने उन पर एक बार फिर भरोसा जताया है।
नामांकन और निर्वाचन प्रक्रिया
हरिवंश जी का हालिया कार्यकाल 9 अप्रैल, 2026 को समाप्त हो गया था। इसके तुरंत बाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत सदस्य (Nominated Member) के रूप में नियुक्त किया। 10 अप्रैल को उन्होंने पद की शपथ ली और 16 अप्रैल को उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया।
विपक्ष के कुछ गुटों द्वारा मतदान प्रक्रिया से दूरी बनाने या सांकेतिक विरोध के बीच, हरिवंश का निर्वाचन सुचारू रूप से संपन्न हुआ। यह भारतीय संसदीय इतिहास का एक अनूठा उदाहरण है जहाँ एक मनोनीत सदस्य को सदन के इस प्रतिष्ठित संवैधानिक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संसदीय सफर और उपलब्धियाँ
हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा में यह तीसरा कार्यकाल है। उनके अब तक के सफर को निम्न बिंदुओं में देखा जा सकता है:
- प्रथम निर्वाचन: 2014 में वे पहली बार जदयू (JD-U) के टिकट पर बिहार से राज्यसभा पहुँचे।
- पहली बार उपसभापति: अगस्त 2018 में उन्होंने पहली बार उपसभापति का चुनाव जीता।
- द्वितीय कार्यकाल: 2020 में दोबारा निर्वाचित होने के बाद वे पुन: उपसभापति चुने गए।
- अनुभव: उन्होंने विशेषाधिकार समिति और नियम समिति सहित कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों का सफलतापूर्वक संचालन किया है।
प्रधानमंत्री और सदन ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि हरिवंश जी ने सदन की गरिमा को हमेशा सर्वोपरि रखा है। उनकी कार्यशैली में वह गहराई और संयम झलकता है जो एक सफल पीठासीन अधिकारी के लिए अनिवार्य है। सदन के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी उनके चयन का स्वागत करते हुए आशा व्यक्त की कि उनके नेतृत्व में उच्च सदन की कार्यवाही सुचारू और सार्थक बनी रहेगी।
पत्रकारिता से राजनीति तक का व्यक्तित्व
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले हरिवंश नारायण सिंह ने पत्रकारिता के क्षेत्र में दशकों तक अमिट छाप छोड़ी है। वे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मीडिया सलाहकार भी रहे हैं। उनकी छवि एक ऐसे बौद्धिक नेता की है जो दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय मर्यादाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं।
मुख्य बिंदु:
- पद: राज्यसभा उपसभापति (तीसरी बार)।
- पृष्ठभूमि: वरिष्ठ पत्रकार और लेखक।
- विशेषता: सदन के पहले ऐसे उपसभापति जो मनोनीत सदस्य के रूप में इस पद पर आसीन हुए।
हरिवंश नारायण सिंह का फिर से चुना जाना न केवल एनडीए गठबंधन की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि सदन में काम करने के उनके पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को सभी ने सराहा है।

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