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नई दिल्ली/भारतीय राजनीति में वार-पलटवार का दौर अब बेहद व्यक्तिगत और ऐतिहासिक संदर्भों तक पहुंच गया है। हाल ही में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने देश के गृह मंत्री अमित शाह की कार्यशैली पर सीधा प्रहार किया है। प्रियंका गांधी ने प्राचीन भारत के महान रणनीतिकार आचार्य चाणक्य का जिक्र करते हुए अमित शाह को आड़े हाथों लिया।
क्या है पूरा मामला?
एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने सत्तापक्ष की रणनीति और विपक्षी दलों के प्रति सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने अमित शाह की ओर इशारा करते हुए कहा, “चाणक्य अगर आज जिंदा होते, तो आपकी कुटिलता और राजनीति करने के इस तरीके को देखकर वे भी चौंक जाते।” प्रियंका गांधी का यह कटाक्ष मुख्य रूप से बीजेपी की उस छवि पर था, जिसमें अक्सर अमित शाह को ‘आधुनिक युग का चाणक्य’ बताया जाता है। कांग्रेस नेता का मानना है कि वर्तमान राजनीति में मर्यादाओं का उल्लंघन हो रहा है और संस्थाओं का इस्तेमाल केवल विपक्ष को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।
विवाद की मुख्य जड़ें
प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में कई गंभीर आरोप लगाए, जो इस बयान की पृष्ठभूमि बने:
संस्थाओं का दुरुपयोग: उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है।
सत्ता का केंद्रीकरण: प्रियंका के अनुसार, जिस प्रकार की ‘कुटिलता’ वर्तमान सत्ता में देखी जा रही है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
ऐतिहासिक तुलना: बीजेपी समर्थक जहां शाह को कुशल रणनीतिकार मानते हैं, वहीं प्रियंका ने ‘कुटिलता’ शब्द का प्रयोग कर इसे नकारात्मक रूप में पेश किया।
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
जैसे ही ज़ी न्यूज़ और अन्य प्रमुख मीडिया घरानों ने इस बयान का वीडियो साझा किया, इंटरनेट पर बहस छिड़ गई। प्रियंका गांधी के समर्थक इसे एक साहसी और सटीक प्रहार बता रहे हैं, वहीं बीजेपी समर्थकों का तर्क है कि कांग्रेस अपनी हार की हताशा में अब व्यक्तिगत अपमान पर उतर आई है। वायरल वीडियो में प्रियंका गांधी के हाव-भाव और उनकी मुस्कान भी काफी चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसे उनके समर्थकों ने ‘आत्मविश्वास’ और विरोधियों ने ‘अहंकार’ करार दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रियंका गांधी अब फ्रंट फुट पर आकर राजनीति कर रही हैं। अमित शाह पर सीधे हमले करके वे यह संदेश देना चाहती हैं कि कांग्रेस अब बीजेपी की ‘रणनीति’ से डरने वाली नहीं है। वहीं, चाणक्य जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व का नाम लेकर उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी के उस नैरेटिव को चुनौती दी है जो शाह को अजेय रणनीतिकार मानता है।
निष्कर्ष
आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह जुबानी जंग और तेज होगी। प्रियंका गांधी का यह ‘चाणक्य’ वाला बयान केवल एक टिप्पणी नहीं, बल्कि विपक्ष की उस नई रणनीति का हिस्सा है जिसमें वे सीधे सत्ता के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सत्तापक्ष इस ‘कुटिलता’ वाले आरोप का जवाब किस प्रकार देता है।
रिपोर्ट: डेस्क, दैनिक संवाद

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