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मुंगेली के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास में 4 अप्रैल का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है, जब नगर के हृदय स्थल पड़ाव चौक में शौर्य, वीरता और स्वाभिमान के शाश्वत प्रतीक शिरोमणि महाराणा प्रताप की विशाल प्रतिमा का भव्य आगमन होगा, जो कि क्षत्रिय समाज के तीन दशकों के लंबे इंतजार, सतत संघर्ष और अटूट संकल्पों की गौरवशाली परिणति है। इस ऐतिहासिक यात्रा की नींव आज से ठीक तीस वर्ष पूर्व वर्ष 1995 में रखी गई थी, जब क्षत्रिय समाज के तत्कालीन दूरदर्शी अध्यक्ष स्वर्गीय विपनेश सिंह परिहार ने समाज के गौरव को पुनर्स्थापित करने का बीड़ा उठाया था और उन्होंने ही सबसे पहले तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष अनिल सोनी के समक्ष पड़ाव चौक का नामकरण “महाराणा प्रताप चौक” करने तथा वहां उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने का औपचारिक प्रस्ताव रखकर इसे शासन तक पहुँचाया था। स्व. परिहार का वह सपना और उनके द्वारा बोया गया संकल्प का बीज, आज वर्ष 2026 में वर्तमान अध्यक्ष आनंद वल्लभ सिंह के ऊर्जावान नेतृत्व और कुशल प्रयासों से एक वटवृक्ष बनकर फल दे रहा है, क्योंकि उनके निरंतर परिश्रम और प्रशासनिक समन्वय के कारण ही यह मांग अब धरातल पर साकार हो रही है। यह सफर महज एक प्रतिमा की स्थापना का नहीं, बल्कि 1995 से लेकर 2026 तक की उस वैचारिक निरंतरता का है जिसने समाज की कई पीढ़ियों को एकजुट रखा। जहाँ एक ओर स्वर्गीय विपनेश सिंह परिहार ने विपरीत परिस्थितियों में इस वैचारिक मशाल को जलाया और सामाजिक मंगल भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं की नींव रखी, वहीं दूसरी ओर आनंद वल्लभ सिंह ने उस विरासत को आधुनिक दौर की प्राथमिकताओं के साथ जोड़कर सिद्धि तक पहुँचाया, जिससे यह सिद्ध होता है कि नेतृत्व का सम्मान तभी है जब वह अपने पूर्वजों के सपनों को पूर्णता प्रदान करे। आज जब प्रतिमा के आगमन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, तब समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता जिनमें शिवप्रताप सिंह, उमाकांत सिंह, गजानंद सिंह, हरिकपुर सिंह, नागेश्वर सिंह, गोकुलेश सिंह, संतोष सिंह, राजू सिंह एवं वंशराज सिंह शामिल हैं, वे न केवल इस भव्य आयोजन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं बल्कि स्व. विपनेश सिंह परिहार के योगदान को श्रद्धापूर्वक याद कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित कर रहे हैं। मुंगेली का पड़ाव चौक अब केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि महाराणा प्रताप की प्रतिमा के साथ वह आने वाली पीढ़ियों के लिए वीरता और सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा का केंद्र बनेगा, जो आनंद वल्लभ सिंह की वर्तमान सक्रियता और स्व. परिहार की ऐतिहासिक दूरदर्शिता का संयुक्त प्रतिफल है। पूरा नगर इस गौरवशाली क्षण का साक्षी बनने के लिए आतुर है, जो यह संदेश देता है कि जब समाज का नेतृत्व संकल्पबद्ध हो और पूर्वजों की विरासत का सम्मान वर्तमान की कर्मठता से मिल जाए, तो दशकों पुराने सपने भी हकीकत में तब्दील हो जाते हैं और यह आयोजन इसी एकता और विजय का प्रतीक बनकर उभरा है।

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