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मुंगेली/ आज के तेज़ रफ्तार और स्वार्थ से भरे दौर में जहां लोग अपने काम और निजी जीवन तक ही सीमित रह जाते हैं, वहीं मुंगेली का एक साधारण सा परिवार अपनी असाधारण सोच के कारण लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कोठारी परिवार ने यह साबित कर दिया है कि इंसानियत और करुणा आज भी जिंदा है बस उसे निभाने का जज़्बा होना चाहिए।

शहर के एक कोने में स्थित उनकी छोटी सी मेडिकल दुकान अब केवल दवाइयों की बिक्री का स्थान नहीं रही। यह जगह अब एक ऐसे केंद्र के रूप में पहचान बना चुकी है, जहां इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पशुओं की भी देखभाल की जाती है। दुकान का शटर खुलते ही आसपास की गायें खुद-ब-खुद वहां पहुंचने लगती हैं, मानो उन्हें पता हो कि यहां उन्हें सिर्फ खाना ही नहीं, बल्कि अपनापन भी मिलेगा।
यह दृश्य किसी भी राहगीर का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। लोग रुककर देखते हैं कि कैसे परिवार के सदस्य गायों को प्यार से सहलाते हैं, उनके लिए चारा और पानी की व्यवस्था करते हैं। कई बार तो यह नज़ारा ऐसा लगता है जैसे यह कोई दुकान नहीं, बल्कि सेवा का एक छोटा सा केंद्र हो, जहां हर दिन बिना किसी स्वार्थ के मदद की जाती है।
कोठारी परिवार के सदस्यों का कहना है कि यह काम उन्होंने किसी योजना के तहत नहीं शुरू किया था। शुरुआत में जब उन्होंने देखा कि आसपास की गायें भूखी-प्यासे भटकती रहती हैं, तो उन्होंने अपने स्तर पर उन्हें खाना देना शुरू किया। धीरे-धीरे यह एक आदत बन गई और अब यह उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है।

परिवार का मानना है कि सेवा का असली अर्थ केवल मनुष्यों की सहायता तक सीमित नहीं है। वे कहते हैं कि हर जीव, चाहे वह इंसान हो या पशु, सभी को समान रूप से दया और सहानुभूति की जरूरत होती है। इसी सोच के चलते वे लगातार बिना किसी प्रचार या दिखावे के इस कार्य को करते आ रहे हैं।
आज के समय में शहरों में आवारा पशुओं की समस्या एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सड़कों पर घूमते ये पशु न केवल खुद परेशान होते हैं, बल्कि कई बार हादसों का कारण भी बनते हैं। ऐसे में कोठारी परिवार की यह पहल न केवल इन पशुओं के लिए राहत का काम कर रही है, बल्कि समाज को भी एक नई दिशा दिखा रही है।
इस पहल का एक और खास पहलू यह है कि परिवार ने कभी इसे प्रचार का माध्यम नहीं बनाया। उन्होंने न तो सोशल मीडिया पर इसका प्रदर्शन किया और न ही किसी प्रकार की प्रसिद्धि की इच्छा रखी। उनके लिए यह केवल एक जिम्मेदारी है, जिसे वे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के बीच इस परिवार की काफी सराहना हो रही है। कई लोग उनके इस कार्य से प्रेरित होकर खुद भी अपने आसपास के पशुओं की मदद करने लगे हैं। इस तरह यह छोटी सी शुरुआत अब एक बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रही है।
समाज में अक्सर यह देखा जाता है कि लोग बड़े-बड़े कार्यों की बात करते हैं, लेकिन छोटे स्तर पर कुछ करने से कतराते हैं। कोठारी परिवार ने इस सोच को बदलने का काम किया है। उन्होंने यह दिखाया है कि बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े दिल की जरूरत होती है।
यह पहल यह भी सिखाती है कि अगर हर व्यक्ति अपने आसपास के वातावरण और जीव-जंतुओं के प्रति थोड़ी सी जिम्मेदारी निभाने लगे, तो समाज में कई समस्याएं अपने आप कम हो सकती हैं। जरूरत केवल संवेदनशीलता और जागरूकता की है।
मुंगेली का यह परिवार आज उन लोगों के लिए एक प्रेरणा बन चुका है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। उनका यह कार्य बताता है कि सेवा केवल बड़े मंचों पर नहीं, बल्कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी की जा सकती है।
अंततः, कोठारी परिवार की यह कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम भी अपने आसपास ऐसी छोटी-छोटी पहल कर सकते हैं, जो किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सके। क्योंकि असली संतोष और खुशी दूसरों की मदद करने में ही छिपी होती है।

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