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मुंगेली | जिले के ग्रामीण इलाकों में आज मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। शुक्रवार दोपहर को तहसील के ग्राम करही, धपई, पंडरभट्टा, छीतापुर, भरदा, खलबोरवा और औँराबाधा में अचानक तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई। इस दौरान कई जगहों पर ओले भी गिरे, जिससे इलाके में ठंडक बढ़ गई है।
फसलों पर असर
खेतों में लगी रबी की फसलों के लिए यह बेमौसम बरसात चिंता का विषय बन गई है। ओलावृष्टि के कारण गेहूं और चने की तैयार फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। अचानक हुई इस बारिश से जनजीवन भी प्रभावित हुआ है और लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश करते नजर आए।
बेमौसम बरसात और ओले क्यों गिर रहे हैं मार्च के महीने में इस तरह की बारिश और ओलावृष्टि के पीछे कुछ प्रमुख भौगोलिक कारण होते हैं
वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ): उत्तर भारत की ओर से आने वाली ठंडी हवाएं जब मध्य भारत की गर्म हवाओं से मिलती हैं, तो नमी के कारण बादल बनते हैं। यह इस समय होने वाली बारिश का सबसे बड़ा कारण है।
हवा का कम दबाव: बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त हवाओं के कारण छत्तीसगढ़ के ऊपर एक चक्रवातीय घेरा (Cyclonic Circulation) बन जाता है, जिससे अचानक बादल छा जाते हैं और तेज बारिश होती है।
ओले कैसे बनते हैं: जब गर्मी के कारण हवा तेजी से ऊपर की ओर उठती है, तो वह अपने साथ पानी की बूंदों को आसमान की बहुत ऊंचाई पर ले जाती है। वहां तापमान काफी कम (शून्य से नीचे) होता है, जिससे ये बूंदें बर्फ बन जाती हैं और गुरुत्वाकर्षण के कारण ओलों के रूप में नीचे गिरती हैं।
ग्लोबल वार्मिंग: तापमान में हो रहे असंतुलन के कारण अब मानसून के अलावा भी अन्य महीनों में भारी बारिश और ओलावृष्टि की घटनाएं बार-बार देखने को मिल रही हैं।

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