{"remix_data":[],"remix_entry_point":"challenges","source_tags":["local"],"origin":"unknown","total_draw_time":0,"total_draw_actions":0,"layers_used":0,"brushes_used":0,"photos_added":0,"total_editor_actions":{},"tools_used":{"transform":1},"is_sticker":false,"edited_since_last_sticker_save":true,"containsFTESticker":false}
रायपुर। राजधानी रायपुर और आसपास के इलाकों में यातायात को सुरक्षित बनाने के तमाम दावों और प्रयोगों के बावजूद सड़क हादसों के आंकड़े डराने वाले हैं। पिछले एक साल (जनवरी 2025 से जनवरी 2026) के भीतर रायपुर जिले में सड़क दुर्घटनाओं ने भयावह रूप ले लिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कुल 2305 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 701 लोगों की मौत हो गई और 1560 लोग घायल होकर अस्पताल पहुँचे।
डेंजर जोन में तेलीबांधा और धरसींवा टॉप पर
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो रायपुर जिले का तेलीबांधा थाना क्षेत्र सबसे खतरनाक साबित हुआ है। इसके बाद धरसींवा और टिकरापारा का नंबर आता है। पुलिस प्रशासन द्वारा ब्लैक स्पॉट चिह्नित करने और साइन बोर्ड लगाने के बावजूद इन क्षेत्रों में हादसों की दर कम नहीं हो रही है।
प्रयोग बहुत, पर परिणाम शून्य
रिपोर्ट के अनुसार, यातायात विभाग ने हादसों को रोकने के लिए दर्जनों प्रयोग किए। संवेदनशील इलाकों में संकेतक बोर्ड, स्पीड ब्रेकर और लाइटों की व्यवस्था की गई, लेकिन ये उपाय केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। शहर के भीतर ट्रैफिक पुलिस की मुस्तैदी वाहनों की चेकिंग तक तो दिखती है, लेकिन मुख्य सड़कों पर बेलगाम रफ्तार पर लगाम कसने में विभाग नाकाम साबित हो रहा है।
गुड सेमेरिटन को प्रोत्साहन
प्रशासन ने सड़क हादसे में घायलों की मदद करने वालों (गुड सेमेरिटन) को प्रोत्साहित करने की योजना भी चलाई है। इस अवधि में 59 लोगों को सम्मानित किया गया जिन्होंने घायलों को समय पर अस्पताल पहुँचाया। इसके अलावा, मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति भी प्रदान की गई है।
शहर के भीतरी इलाकों में राहत
एक तरफ जहाँ हाईवे और बाहरी इलाकों में मौतें बढ़ रही हैं, वहीं शहर के भीतरी थानों जैसे गोलबाजार, आजाद चौक और सरस्वती नगर में हादसों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है। इसका मुख्य कारण संकरी सड़कें और वाहनों की कम रफ्तार मानी जा रही है।
विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि पुलिस, पीडब्ल्यूडी और स्वास्थ्य विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। हाईवे पेट्रोलिंग और सीसीटीवी की संख्या बढ़ाई जा रही है ताकि भविष्य में इन आंकड़ों को कम किया जा सके।

The News Related To The News Engaged In The Dainik Samvad Chhattisgarh Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.
