इस्तीफों की सियासत के बीच विकास का दावा अध्यक्ष ने कहा, नियमों के तहत लिए गए हर फैसले
मुंगेली / नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी कारण बताओ सूचना के बीच नगर पालिका परिषद मुंगेली के अध्यक्ष रोहित शुक्ला ने बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि वे जनता के हक और विकास के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं, और यदि इस लड़ाई में उन्हें जेल भी जाना पड़े तो उससे भी पीछे नहीं हटेंगे। उनके इस बयान ने न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज कर दी है।
यह पूरा मामला President-in-Council (PIC) के गठन, सदस्यों के बार-बार इस्तीफे और समिति की बैठक आयोजित न होने से जुड़ा है। विभाग ने इन बिंदुओं को लेकर अध्यक्ष से 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस जारी होते ही यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया, लेकिन अध्यक्ष के ताजा बयान ने इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।


रोहित शुक्ला ने अपने पक्ष को मजबूती से रखते हुए कहा कि उनके द्वारा लिए गए सभी निर्णय पूरी तरह छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुरूप हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि PIC का गठन विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत किया गया और समय-समय पर प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सदस्यों का मनोनयन किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सदस्यों के इस्तीफे देना पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय होता है और अध्यक्ष के रूप में इस पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है। “जब भी किसी सदस्य ने इस्तीफा दिया, तब हमने व्यवस्था को बनाए रखने के लिए तुरंत वैकल्पिक कदम उठाए, ताकि नगर के विकास कार्य प्रभावित न हों,” उन्होंने कहा।
अध्यक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि PIC की नियमित बैठक नहीं हो पाई, लेकिन इसके पीछे परिस्थितिजन्य कारण रहे। उन्होंने बताया कि बार-बार होने वाले इस्तीफों के कारण समिति का स्थायित्व प्रभावित हुआ, जिससे बैठक आयोजित करने में बाधाएं आईं। “यह प्रशासनिक चुनौती थी, न कि लापरवाही,” उन्होंने स्पष्ट किया।
रोहित शुक्ला ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा जनता के हित और शहर के विकास को आगे बढ़ाना रही है। उन्होंने कहा कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में काम नहीं करते और जनहित से जुड़े मुद्दों पर कभी समझौता नहीं करेंगे। “अगर जनता की आवाज उठाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए मुझे किसी भी प्रकार की सजा भुगतनी पड़े, तो मैं उसके लिए तैयार हूं,” उन्होंने दृढ़ता से कहा।
इस बयान के बाद शहर के राजनीतिक वातावरण में हलचल और तेज हो गई है। एक ओर उनके समर्थक इसे एक मजबूत और जनहितैषी नेतृत्व का संकेत मान रहे हैं, वहीं विरोधी इसे एक राजनीतिक बयान करार दे रहे हैं। हालांकि आम जनता के बीच यह संदेश साफ तौर पर गया है कि अध्यक्ष अपने निर्णयों पर कायम हैं और पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
सूत्रों के अनुसार, अध्यक्ष द्वारा विभाग को भेजे जाने वाले जवाब की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। इसमें सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ यह स्पष्ट किया जाएगा कि PIC की बैठक नहीं हो पाने के पीछे मुख्य कारण बार-बार होने वाले इस्तीफे और समिति के पुनर्गठन की स्थिति रही है। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि सभी निर्णय नगर के विकास कार्यों को निरंतर बनाए रखने के उद्देश्य से लिए गए थे।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के नोटिस एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, जिनका उद्देश्य तथ्यों की पुष्टि करना होता है। यदि संबंधित अधिकारी समय पर और स्पष्ट जवाब प्रस्तुत करता है, तो अधिकांश मामलों में स्थिति स्पष्ट हो जाती है और विवाद समाप्त हो जाता है। हालांकि, इस मामले में अध्यक्ष का सार्वजनिक बयान इसे एक राजनीतिक आयाम भी दे सकता है।
नगर के सामाजिक और राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और भी महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि एक ओर प्रशासनिक जवाब प्रक्रिया चल रही है, वहीं दूसरी ओर अध्यक्ष का सख्त रुख भी सामने आ चुका है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि विभाग अध्यक्ष के जवाब पर क्या निर्णय लेता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई है कि नगर की राजनीति अब केवल प्रशासनिक दायरे तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें जनभावनाएं और नेतृत्व की छवि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रोहित शुक्ला का यह बयान कि वे जनता के लिए जेल जाने को भी तैयार हैं, उनके समर्थकों के बीच एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल, पूरे मामले की दिशा अब अध्यक्ष द्वारा दिए जाने वाले आधिकारिक जवाब और विभाग की आगामी कार्यवाही पर निर्भर करेगी। लेकिन इतना तय है कि इस बयान के बाद यह मुद्दा अब सिर्फ एक नोटिस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह नगर की राजनीति और नेतृत्व की परीक्षा का विषय बन चुका है।

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