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बिलासपुर / छत्तीसगढ़ के चर्चित विवादित टिप्पणी मामले में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के अध्यक्ष अमित बघेल को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। रायपुर के वीआईपी रोड स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने के बाद अग्रवाल और सिंधी समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोपी अमित बघेल को कोर्ट ने शर्तों के साथ जेल से बाहर आने की अनुमति दी है। बिलासपुर हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अमित बघेल की नियमित जमानत (Regular Bail) याचिका को तो खारिज कर दिया, लेकिन उन्हें 3 महीने की अंतरिम जमानत (Interim Bail) प्रदान की है। इसका अर्थ है कि बघेल को फिलहाल 3 महीनों के लिए जेल से रिहाई मिलेगी, जिसके बाद उन्हें पुन अदालती प्रक्रिया का सामना करना होगा। कोर्ट ने जमानत देते समय एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सख्त शर्त रखी है। बघेल अगले 3 महीनों तक रायपुर जिले की सीमा के भीतर निवास नहीं कर सकेंगे। उन्हें रायपुर जिले से बाहर रहना होगा। हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेशी के लिए उन्हें निर्धारित तिथियों पर रायपुर आने की विशेष अनुमति दी गई है।
क्या था पूरा विवाद?
यह पूरा मामला रायपुर के VIP चौक पर स्थित ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ की प्रतिमा के खंडित होने से जुड़ा है। प्रतिमा टूटने की घटना के बाद प्रदेश में काफी आक्रोश था। इसी दौरान अमित बघेल ने एक सार्वजनिक बयान दिया जिसमें उन्होंने अग्रवाल और सिंधी समाज को लेकर अपमानजनक और विवादास्पद टिप्पणियां कीं।इन टिप्पणियों के बाद समाज के विभिन्न वर्गों में भारी गुस्सा देखा गया। बघेल के खिलाफ रायपुर के अलग-अलग थानों के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी शिकायतें दर्ज कराई गईं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उन पर इस मामले में कुल 14 एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थीं। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दिसंबर 2025 में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई
बघेल की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट से बघेल को राहत देने की अपील की, जिसके आधार पर कोर्ट ने उन्हें 3 महीने की अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने मोर्चा संभाला, वहीं शिकायतकर्ता की ओर से वकील सुनील ओटवानी ने दलीलें पेश कीं। विपक्ष का तर्क था कि बघेल की टिप्पणी से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा है, इसलिए उन्हें नियमित जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
सामाजिक और राजनीतिक निहितार्थ
अमित बघेल छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय राजनीति में एक सक्रिय चेहरा हैं। उनकी गिरफ्तारी और अब सशर्त रिहाई ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। कोर्ट का रायपुर जिले में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का फैसला संभवतः शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार के संभावित टकराव को टालने के उद्देश्य से लिया गया है। अमित बघेल को मिली यह राहत ‘शर्तों के साथ’ है। 3 महीने की यह अवधि उनके लिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इस दौरान उन्हें कानून के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा और रायपुर की सीमा से बाहर रहना होगा। समाज के एक बड़े वर्ग की नजरें अब इस मामले की अगली कानूनी कार्यवाही पर टिकी हैं।

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