दिल्ली /भारतीय राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक बड़े घटनाक्रम के तहत, देश के नए शिक्षा मंत्री के रूप में प्रह्लाद जोशी ने आधिकारिक तौर पर कार्यभार संभाल लिया है। यह राजनीतिक उलटफेर तब देखने को मिला जब देशव्यापी छात्र आंदोलनों और NEET-UG परीक्षा की शुचिता को लेकर बने भारी दबाव के बीच तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। इसके तुरंत बाद, सरकार में एक अनुभवी और कद्दावर नेता माने जाने वाले प्रह्लाद जोशी को उनके वर्तमान पोर्टफोलियो के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया।
प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक सफर और वर्तमान जिम्मेदारियां
मूल रूप से कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से छह बार के सांसद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आने वाले प्रह्लाद जोशी मोदी सरकार के सबसे भरोसेमंद और वरिष्ठ मंत्रियों में शुमार किए जाते हैं। वर्तमान में वे उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे हैं। इसके अलावा, अपने पिछले कार्यकाल (2019 से 2024 के बीच) में वे संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी भी सफलतापूर्वक निभा चुके हैं। उनकी सांगठनिक क्षमता और संकट प्रबंधन कौशल को देखते हुए सरकार ने उन्हें ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है जब पूरा देश और छात्र समुदाय शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की आस लगाए बैठा है।
क्यों आया यह बदलाव? NEET-UG विवाद और जंतर-मंतर का धरना
यह पूरा प्रशासनिक फेरबदल पिछले कई हफ्तों से चल रहे गंभीर घटनाक्रमों की एक बड़ी परिणति है। देश में NEET-UG परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक के मामलों और धांधली के आरोपों को लेकर छात्रों में भारी असंतोष व्याप्त था। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में पिछले 36 दिनों से लगातार धरना-प्रदर्शन चल रहा था। आंदोलनकारियों और विपक्षी दलों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल सुधार की थी। बढ़ते जनाक्रोश और राजनीतिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद सरकार के साथ चली वार्ताओं के दौर के बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई।
नए शिक्षा मंत्री के सामने आने वाली चुनौतियां और प्राथमिकताएं
प्रह्लाद जोशी के लिए शिक्षा मंत्रालय का यह अतिरिक्त प्रभार किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए परीक्षा तंत्र को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाना है। कार्यभार संभालने के बाद राजनीतिक हलकों और शिक्षाविदों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जोशी किस प्रकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन को गति देते हैं और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार लाकर परीक्षा माफियाओं पर नकेल कसते हैं।
विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने भी नए मंत्री से उम्मीद जताई है कि वे संवाद का रास्ता अपनाकर छात्रों की जायज़ मांगों पर जल्द ठोस कदम उठाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप, प्रह्लाद जोशी के कंधों पर अब न केवल अपने मौजूदा विभागों की जिम्मेदारी है, बल्कि भारत की भावी पीढ़ी के शैक्षणिक भविष्य को एक मजबूत और सुरक्षित दिशा देने की ऐतिहासिक जवाबदेही भी आ गई है।

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