मुंगेली। भारतीय जनता पार्टी द्वारा महिला आरक्षण के विषय पर फैलाए जा रहे कथित भ्रामक प्रचार और राजनैतिक लाभ लेने की कोशिशों के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के आह्वान पर मुंगेली जिला मुख्यालय में आयोजित एक विशाल पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक ममता चंद्राकर, जिला अध्यक्ष घनश्याम वर्मा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों को महिला विरोधी और षड्यंत्रकारी करार दिया। कांग्रेस नेताओं ने दो टूक कहा कि भाजपा जिस महिला आरक्षण का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, वह वास्तव में महिलाओं के साथ किया गया एक बड़ा संवैधानिक छलावा है।
“आरक्षण नहीं, सीटों के जोड़-तोड़ में लगी है भाजपा”
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पंडरिया की पूर्व विधायक ममता चंद्राकर ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री तक जनता के बीच सरासर असत्य परोस रहे हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा यह झूठ फैला रही है कि विपक्षी दलों के असहयोग के कारण बिल पास नहीं हुआ, जबकि हकीकत यह है कि 128वां संविधान संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति जी के हस्ताक्षर के बाद कानून का रूप ले चुका है। असली सवाल यह है कि जब कानून बन चुका है, तो सरकार इसे तुरंत लागू करने से क्यों बच रही है? भाजपा 2023 के इस कानून को ठंडे बस्ते में डालकर इसे 2034 तक क्यों खींचना चाहती है?”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी महिला सांसदों के सवालों से इतने भयभीत थे कि वे लोकसभा की कार्यवाही तक में शामिल नहीं हुए। जो सरकार महिलाओं की शक्ति से डरती है, वह उन्हें सदन में हक देने की मंशा कैसे रख सकती है? परिसीमन की आड़ में संवैधानिक साजिश
कांग्रेस नेताओं ने पत्रकार वार्ता में तकनीकी तथ्यों के साथ भाजपा को घेरा। उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल 2026 को संसद में लाया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक असल में महिला आरक्षण का नहीं, बल्कि परिसीमन संशोधन बिल था। भाजपा महिला आरक्षण को एक ‘मुखौटा’ बनाकर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या को अपने मनमुताबिक बढ़ाना चाहती थी। इस विधेयक के माध्यम से लोकसभा सीटों को 850 तक ले जाने का प्रस्ताव था, जिसे विपक्षी दलों की एकजुटता ने विफल कर दिया।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब 2026-27 की जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने वाली है और जाति जनगणना की मांग उठ रही है, तो सरकार 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन क्यों थोपना चाहती थी? यदि सरकार की मंशा साफ होती, तो वह परिसीमन और जनगणना की शर्तों को हटाकर वर्तमान सीटों पर ही तत्काल प्रभाव से 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर सकती थी। कांग्रेस और पूरा विपक्ष इस ऐतिहासिक कदम के लिए बिना किसी शर्त के तैयार था और है।
कांग्रेस ही महिला सशक्तिकरण की जननी
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस ने अपने स्वर्णिम इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया कि महिलाओं को सत्ता की मुख्यधारा में लाने का श्रेय केवल कांग्रेस को जाता है।
मई 1989 तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पंचायतों और नगर पालिकाओं में एक-तिहाई आरक्षण का बीज बोया था।
अप्रैल 1993: पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार ने इसे कानून बनाकर धरातल पर उतारा।
मार्च 2010: डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पारित कराया था।
आज देशभर में जो 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि नेतृत्व कर रही हैं, वह कांग्रेस की दूरगामी सोच का ही परिणाम है। भाजपा का षड्यंत्र केवल सीटों के गणित तक सीमित है, जबकि कांग्रेस महिलाओं की वास्तविक भागीदारी चाहती है।
इन नेताओं की रही गरिमामयी उपस्थिति
भाजपा के ‘षड्यंत्र’ को बेनकाब करने के लिए आयोजित इस प्रेस वार्ता में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ा। मुख्य रूप से पूर्व विधायक ममता चंद्राकर के साथ जिलाध्यक्ष घनश्याम वर्मा, शहर अध्यक्ष दीपक गुप्ता,पूर्व विधानसभा प्रत्याशी संजीत बनर्जी, मायारानी सिंह, जागेश्वरी वर्मा, उर्मिला यादव, स्वतंत्र मिश्रा, संजय यादव, अभिलाष सिंह, खुशबू वैष्णव, श्रीनिवास ठाकुर,बिंदु यादव, शकीरा, ललिता सोनी, अनिता विश्वकर्मा, जाहिदा बेगम, निधि पौराणिक, वैशाली सोनी, आराधना तिवारी, साधना वर्मा, मनोरमा गुप्ता, ममता वर्मा सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे गाँव-गाँव जाकर भाजपा के इस महिला विरोधी चेहरे और आरक्षण के नाम पर किए जा रहे छलावे की सच्चाई जनता तक पहुँचाएंगे।


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