मुंगेली। जिले के फास्टरपुर क्षेत्र में प्रस्तावित आर.एस.एल.डी. बायोफ्यूल्स प्रा.लि. के मल्टी इंटीग्रेटेड प्लांट को लेकर अब सियासी पारा गरमा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन तिवारी ने इस प्लांट को इलाके के लिए एक ‘पर्यावरणीय अभिशाप’ बताते हुए कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि यह प्लांट स्थापित हुआ, तो आसपास के 20 गांव पानी की एक-एक बूंद के लिए मोहताज हो जाएंगे।
करोड़ों लीटर पानी का दोहन और बंजर होती जमीन
श्री तिवारी ने आंकड़ों के साथ चिंता जाहिर करते हुए कहा कि 600 केएलडी डिस्टलरी, एथेनॉल और बिजली प्लांट के लिए जमीन के हजारों फीट नीचे से करोड़ों लीटर पानी खींचा जाएगा। चूँकि फास्टरपुर में कोई नदी या बड़ा बांध नहीं है, इसलिए भूजल स्तर रिचार्ज नहीं हो पाएगा। परिणाम स्वरूप, जो इलाका पहले ही फरवरी से जून तक सूखे की मार झेलता है, वह पूरी तरह बंजर हो जाएगा।
नेताओं की चुप्पी और जनसुनवाई पर सवाल
अर्जुन तिवारी ने स्थानीय नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि 17 नवंबर 2025 को हुई जनसुनवाई केवल एक दिखावा थी, जिसमें कई कानूनी त्रुटियां हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस फर्जीवाड़े को एनजीटी (NGT) और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
आर-पार की लड़ाई का ऐलान
उन्होंने प्लांट प्रबंधन को मशविरा दिया है कि वे इस संयंत्र को किसी नदी या बांध के पास शिफ्ट करें। श्री तिवारी जल्द ही अपनी टीम और स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ इलाके के गांवों का दौरा कर जन-आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा, “जनता के हक और पानी की रक्षा के लिए हम किसी भी स्तर तक लड़ने को तैयार हैं।”

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