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मुंगेली /दिनांक 6 जून 2026 को पड़ाव चौक लोरमी बायपास मार्ग पर स्थित वैष्णव कैफेटेरिया के सामने एक बेहद हृदयविदारक, दर्दनाक और रूह कंपा देने वाला हादसा सामने आया, जिसने न केवल मानव जाति की मरती हुई संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही और प्रशासनिक नाकामी को भी पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। यहाँ सड़क के किनारे अत्यंत शांति और मासूमियत से जमीन पर बैठे एक छोटे से बेजुबान बछड़े को एक अज्ञात तेज रफ्तार काली कार के चालक ने घोर लापरवाही, क्रूरता और अमानवीयता का प्रदर्शन करते हुए बेरहमी से कुचल दिया और गाड़ी का भारी पहिया उसके नाजुक शरीर के ऊपर से निकालते हुए चालक बड़ी आसानी से मौके से फरार हो गया।

इस भीषण और दर्दनाक टक्कर के कारण अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव, गंभीर चोटों और असहनीय पीड़ा से उस मासूम बेजुबान जीव ने घटना स्थल पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया, जिसके बाद वहां से गुजरने वाले और वैष्णव कैफेटेरिया के आसपास मौजूद स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों तथा राहगीरों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। स्थानीय लोगों का गुस्सा इस बात पर फूटा है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि आए दिन इस बायपास रोड पर तेज रफ्तार वाहन चालक अपनी गाड़ियों को रेस ट्रैक की तरह दौड़ाते हुए इन मूक और बेसहारा पशुओं को अपनी रफ़्तार की सनक में बेरहमी से कुचल देते हैं और उनकी इस तरह ‘हत्या’ करने के बाद भी अपराधियों में कानून का कोई खौफ या डर नहीं रह गया है क्योंकि हमारे देश और राज्य में पशु क्रूरता और ‘हिट एंड रन’ के मामलों को लेकर कड़े कानूनों का पूर्ण अभाव साफ़ नजर आता है। वर्तमान में लागू कानून इतने लचर और कमजोर हैं कि बेजुबान जानवरों को कुचलने वाले अपराधियों को बहुत मामूली सजा या जुर्माने के बाद छोड़ दिया जाता है, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं और यही वजह है कि जब तक इस देश में मूक प्राणियों के संरक्षण के लिए गैर-जमानती और कड़े कानूनों का निर्माण नहीं किया जाता, तब तक सड़कों पर इंसानियत इसी तरह रोज दम तोड़ती रहेगी और बेजुबान पशु इस क्रूरता का शिकार होते रहेंगे।

इस अत्यंत दुखद हादसे का दूसरा और सबसे गंभीर पहलू सरकार तथा स्थानीय नगर पंचायत प्रशासन की वह भारी अनदेखी और लापरवाही है, जिसके कारण आज छत्तीसगढ़ के मुंगेली सहित विभिन्न क्षेत्रों में हजारों आवारा पशु सड़कों पर बैठने और अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं, क्योंकि उनके संवर्धन, संरक्षण और पुनर्वास के लिए सरकार द्वारा धरातल पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही है। सरकारें और नेता बड़े-बड़े चुनावी मंचों से गौ-संरक्षण, कांजी हाउस के निर्माण और पशु कल्याण की बड़ी-बड़ी योजनाएं तो गिनाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत लोरमी बायपास की इस रक्त रंजित सड़क पर साफ़ बयां हो रही है, जहाँ बेसहारा मवेशियों के रहने के लिए न तो कोई सुव्यवस्थित आश्रय स्थल है, न ही सड़कों पर बैठने वाले इन मूक पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के लिए नगर पंचायत या पशुधन विभाग कोई ठोस कदम उठाता है और न ही रात के अंधेरे में सुरक्षा की दृष्टि से इन पशुओं के गले में रेडियम बेल्ट जैसी कोई सामान्य व्यवस्था की जाती है जिससे वाहन चालकों को ये दूर से दिखाई दे सकें। इस प्रशासनिक उदासीनता और वाहन चालकों की अंधाधुंध रफ़्तार के गठजोड़ ने लोरमी बायपास को बेजुबानों के लिए कत्लगाह बना दिया है, जिसे लेकर अब क्षेत्र के सजग नागरिकों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और सख्त लहजे में मांग की है कि वैष्णव कैफेटेरिया तथा पड़ाव चौक के आसपास लगे सभी व्यावसायिक व सरकारी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज तत्काल खंगालकर उस अज्ञात काली कार और उसके क्रूर चालक की पहचान की जाए, उसे तुरंत गिरफ्तार कर उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए, इस व्यस्त चौराहे पर गति पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल प्रभाव से वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर) का निर्माण किया जाए, और सरकार कागजी दावों तथा खोखले वादों को छोड़कर धरातल पर आकर सड़कों पर बैठे इन आवारा पशुओं के रहने तथा उनके भोजन व पुनर्वास का पुख्ता व स्थाई इंतजाम करे, ताकि भविष्य में किसी अन्य मासूम बेजुबान जीव को इस तरह अपनी अनमोल जान न गंवानी पड़े और इस सोए हुए शासन-प्रशासन को जगाकर इस क्रूरता के खिलाफ एक कड़ा संदेश दिया जा सके।

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