मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के जरहागांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बरेला में पिछले दिनों हुई एक हिंसक झड़प ने अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। इस मामले में ‘गौ सेवा कल्याण समिति’ (गौ सेवा धाम, मुंगेली) ने स्थानीय पुलिस प्रशासन पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए एकतरफा और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने की शिकायत दर्ज कराई है। समिति के पदाधिकारियों ने जिला पुलिस अधीक्षक (SP) को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। समिति का आरोप है कि पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है और जानबूझकर एक सक्रिय गौ सेवक को झूठे मामले में फंसाया जा रहा है, जबकि मुख्य आरोपी राजनीतिक रसूख के कारण खुलेआम घूम रहे हैं।
क्या है पूरा मामला: 28 मई की रात की घटना
प्राप्त जानकारी और पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए आधिकारिक पत्र के अनुसार, घटना दिनांक 28 मई 2026 की रात की है। बरेला निवासी 19 वर्षीय अभय ठाकुर, जो कि राजकुमार सिंह के पुत्र हैं और ‘गौ सेवा कल्याण समिति’ के एक बेहद सक्रिय सदस्य हैं, उनके ही मोहल्ले में कुछ स्थानीय लोगों के साथ विवाद हो गया था। इस विवाद ने धीरे-धीरे हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि इस झड़प और विवाद में लगभग 8 से 10 लोग सीधे तौर पर शामिल थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घटना में स्थानीय नगर पंचायत अध्यक्ष नरेश पटेल (बरेला) भी कथित तौर पर मौजूद और संलिप्त थे।
विवाद के तुरंत बाद, जरहागांव थाना पुलिस ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। लेकिन समिति का आरोप है कि पुलिस ने न्यायसंगत तरीके से जांच करने के बजाय बेहद पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। पुलिस ने घटना में शामिल अन्य रसूखदार लोगों और नगर पंचायत अध्यक्ष नरेश पटेल के खिलाफ कोई ठोस या प्रभावी कानूनी कदम नहीं उठाया, बल्कि इसके विपरीत सारा दोष अकेले 19 वर्षीय अभय ठाकुर पर मढ़ दिया। पुलिस ने अभय ठाकुर को ही मुख्य लक्ष्य (Target) बनाते हुए उनके खिलाफ एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी।
गौ तस्करी सिंडिकेट और व्यक्तिगत दुर्भावना की आशंका
गौ सेवा कल्याण समिति के अध्यक्ष मनीष वैष्णव और कोषाध्यक्ष विनय शुक्ला सहित अन्य वरिष्ठ सदस्यों का कहना है कि अभय ठाकुर लंबे समय से मुंगेली जिले और आसपास के क्षेत्रों में अवैध गौ तस्करी को रोकने में अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। वे क्षेत्र में सक्रिय अवैध गौ तस्करी नेटवर्क के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके थे। अभय ठाकुर ने अतीत में कई बार संदिग्ध वाहनों की सटीक जानकारी सीधे पुलिस और जिला प्रशासन को दी है, जिसके कारण कई तस्करों को जेल की हवा खानी पड़ी है और बड़ी संख्या में मवेशियों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया गया है।
समिति के पदाधिकारियों ने आशंका जताई है कि इसी सक्रियता के कारण स्थानीय स्तर पर सक्रिय गौ तस्करी सिंडिकेट, कुछ स्थानीय नेताओं और पुलिस विभाग के कुछ संलिप्त कर्मचारियों के बीच अभय के प्रति गहरी व्यक्तिगत दुर्भावना पैदा हो गई थी। इसी रंजिश का फायदा उठाते हुए, 28 मई की आपसी झड़प को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया ताकि अभय ठाकुर को कानूनी पचड़ों में उलझाकर उनके गौ रक्षा के काम को पूरी तरह से बंद कराया जा सके।
पुलिस अधीक्षक से की गई प्रमुख मांगें
गौ सेवा कल्याण समिति द्वारा मुंगेली पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए पत्र क्रमांक 29 के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गई हैं:
निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच: जरहागांव पुलिस की भूमिका संदिग्ध होने के कारण किसी स्वतंत्र उच्च अधिकारी से पूरे घटनाक्रम की दोबारा निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सभी आरोपियों पर समान कार्रवाई: घटना में शामिल नगर पंचायत अध्यक्ष नरेश पटेल सहित सभी 8 से 10 व्यक्तियों के विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तत्काल कानूनी मामला दर्ज हो।
दोषी अधिकारियों पर विभागीय एक्शन: यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि जरहागांव थाने के किसी अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग कर जानबूझकर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की है, तो उस पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे मामले में अभी तक स्थानीय जरहागांव पुलिस या नगर पंचायत अध्यक्ष नरेश पटेल की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, एसपी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, ज्ञापन को संज्ञान में ले लिया गया है और मामले की प्राथमिक समीक्षा के आदेश दे दिए गए हैं। देखना यह होगा कि क्या जिला पुलिस प्रशासन इस संवेदनशील मामले में पारदर्शिता बरतते हुए निष्पक्षता से जांच कराता है, या फिर राजनीतिक दबाव के चलते यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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