रायपुर। देशव्यापी स्तर पर तेल कंपनियों द्वारा ईंधन की कीमतों में की गई भारी बढ़ोतरी के बाद छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों और परिवहन क्षेत्र पर महंगाई का दोहरा बोझ आ पड़ा है, 25 मई को पेट्रोल की कीमतों में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की तगड़ी वृद्धि की गई है, जिसके कारण राज्य के कम से कम आठ जिलों में पेट्रोल का भाव ₹109 प्रति लीटर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है। इस हालिया मूल्य वृद्धि के मुख्य कारणों पर नजर डालें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आया भारी उतार-चढ़ाव इसका सबसे बड़ा जिम्मेदार माना जा रहा है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य व राजनैतिक जंग शुरू होने से पहले वैश्विक बाजार में जो क्रूड ऑयल महज 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मिल रहा था, वह अब उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में इस तरह की आग लगने से घरेलू तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बन रहा था, जिसकी वजह से अपने लगातार बढ़ते घाटे की भरपाई करने के लिए कंपनियों को मजबूरी में यह बड़ा कदम उठाना पड़ा है और विशेषज्ञों का स्पष्ट तौर पर यह भी कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम और भी ज्यादा बढ़ाए जा सकते हैं।

गौरतलब है कि देश के भीतर ईंधन के दाम मुख्य रूप से दो प्रमुख कारकों—अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मौजूदा कीमत और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की विनिमय स्थिति—के आधार पर तय किए जाते हैं, और इसी व्यवस्था के तहत सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम का पालन करते हुए हर दिन सुबह ठीक 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं, जिसमें बेस प्राइस से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने के बीच तेल की मूल कीमतों में कई तरह के केंद्रीय व राज्य स्तरीय टैक्स और स्थानीय परिवहन खर्च (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) जुड़ जाते हैं, जिससे ईंधन की अंतिम कीमत बेस प्राइस से लगभग चार गुना तक बढ़ जाती है।
छत्तीसगढ़ के भौगोलिक परिदृश्य और जिलावार दरों का विश्लेषण करें तो इस महीने में चौथी बार हुए ईंधन के दामों में इजाफे के बाद सरगुजा और बस्तर संभाग के सुदूर व दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, क्योंकि राज्य में ईंधन की सबसे ऊंची और रिकॉर्ड कीमतें इन्हीं क्षेत्रों में दर्ज की गई हैं; विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि बस्तर एवं सरगुजा संभाग के दूरस्थ जिलों में मुख्य डिपो से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (परिवहन लागत) बहुत अधिक आती है, जिसके कारण वहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें अन्य मैदानी जिलों की तुलना में काफी ज्यादा रहती हैं, जबकि इसके विपरीत राज्य के बड़े शहरों और प्रमुख औद्योगिक जिलों में ईंधन की निर्बाध व बेहतर सप्लाई चेन होने के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर और मामूली राहत देखने को मिलती है। दैनिक मूल्य सूची के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में इस समय सबसे महंगा पेट्रोल नारायणपुर जिले में ₹109.65 प्रति लीटर और डीजल ₹102.86 प्रति लीटर की दर पर बिक रहा है, जबकि जगदलपुर में पेट्रोल ₹109.64 व डीजल ₹102.86, दंतेवाड़ा में पेट्रोल ₹109.60 व डीजल ₹102.83, और बीजापुर में पेट्रोल ₹109.59 व डीजल ₹102.83 प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। इसी तरह सरगुजा संभाग के जिलों में भी ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं, जहां जशपुर में पेट्रोल की कीमत ₹109.52 (डीजल ₹102.72), सूरजपुर में पेट्रोल ₹109.39 (डीजल ₹102.59), राजनांदगांव में पेट्रोल ₹108.98 (डीजल ₹102.19), रायगढ़ में पेट्रोल ₹109.30 (डीजल ₹102.07), और अंबिकापुर में पेट्रोल ₹109.09 व डीजल ₹102.29 प्रति लीटर दर्ज किया गया है। राज्य के अन्य प्रमुख हिस्सों की बात करें तो बिलासपुर में पेट्रोल ₹108.65 व डीजल ₹101.86, महासमुंद में पेट्रोल ₹108.64 व डीजल ₹101.84, धमतरी में पेट्रोल ₹108.45 व डीजल ₹101.66, और दुर्ग में पेट्रोल ₹108.29 व डीजल ₹101.50 प्रति लीटर तक जा पहुंचा है; वहीं दूसरी तरफ प्रदेश की राजधानी रायपुर में पेट्रोल की कीमत ₹107.96 प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर है और डीजल ₹101.17 प्रति लीटर पर मिल रहा है, जो कि बड़े शहरों की श्रेणी में अपेक्षाकृत कुछ कम होने के बावजूद आम वाहन चालकों की जेब पर एक बहुत बड़ा अतिरिक्त वित्तीय बोझ है। हालांकि, इस भारी संकट के बीच जांजगीर-चांपा में डीजल ₹101.42, कांकेर में डीजल ₹102.29, और कवर्धा में डीजल ₹102.06 प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है, जबकि प्रदेश में सबसे कम कीमत वाला पेट्रोल वर्तमान में कोरबा जिले में दर्ज किया गया है, जहां पेट्रोल ₹107.63 प्रति लीटर और डीजल ₹100.85 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है, जिससे वहां के स्थानीय निवासियों को बाकी जिलों की तुलना में बेहद सीमित ही सही, पर थोड़ी राहत अवश्य मिली है।
इस लगातार और अप्रत्याशित रूप से बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों का सीधा और विनाशकारी असर अब आम जनता के बजट और हर दिन के रोजमर्रा के खर्चों पर साफ दिखाई देने लगा है, जिससे मध्यम और निम्न वर्ग के लोग बेहद परेशान और लाचार नजर आ रहे हैं; इस गंभीर स्थिति को लेकर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और माल ढुलाई संघों का स्पष्ट रूप से कहना है कि डीजल और पेट्रोल के इतने महंगे होने से न केवल माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स कॉस्ट) में भारी बढ़ोतरी होगी बल्कि यात्री बसों और ऑटो का किराया भी सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है, जिसका अंतिम खामियाजा सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं को ही भुगतना पड़ेगा क्योंकि परिवहन लागत बढ़ते ही फल, सब्जी, दूध और राशन जैसी अत्यंत आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बाजार में तत्काल बढ़ जाती हैं। इस भीषण ईंधन संकट, लगातार बढ़ती कीमतों और जनता के बीच उपजे भारी असंतोष के बीच छत्तीसगढ़ का स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है; ईंधन की कमी का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा की जाने वाली जमाखोरी और अवैध मुनाफे को रोकने के लिए रायपुर कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाते हुए राजधानी समेत पूरे जिले में पेट्रोल-डीजल की ब्लैक मार्केटिंग (कालाबाजारी) पर पैनी नजर रखने और उसकी प्रभावी रोकथाम के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। प्रशासन ने सख्त हिदायत देते हुए शहर के सभी पेट्रोल पंप संचालकों और डीलरों को सचेत किया है कि शहर में कहीं भी निर्धारित दरों से अधिक कीमत की वसूली नहीं की जानी चाहिए, और यदि कोई भी पेट्रोल पंप संचालक ईंधन संकट का नाजायज फायदा उठाकर ब्लैक मार्केटिंग करते हुए या किसी भी उपभोक्ता से तय कीमत से एक भी रुपया अतिरिक्त वसूलते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अत्यंत कठोर दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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