मुंगेली। जैसे-जैसे गर्मी के थपेड़े बढ़ रहे हैं, मुंगेली नगर में जल संकट गहराता जा रहा है। एक ओर जहां प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ग्रीष्मकालीन जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर समीक्षा बैठकें कर रहे हैं, वहीं मुंगेली नगर पालिका का उदासीन रवैया आम जनता पर भारी पड़ रहा है। शहर के राजेंद्र वार्ड और विवेकानंद वार्ड में स्थिति इतनी विकट हो गई है कि लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए मोहताज हैं।
बोर धंसा, मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
राजेंद्र वार्ड और विवेकानंद वार्ड की सीमा पर राकेश जोशी के घर के पास स्थित बोर पंप, जिससे सारथीपारा, पटवापारा और देवांगनपारा में जल आपूर्ति होती थी, पिछले 2-3 महीनों से बंद पड़ा है। बताया जा रहा है कि वाटर लेवल गिरने और बोर धंसने की वजह से यह स्थिति निर्मित हुई है। कई बार मरम्मत के बावजूद समस्या का स्थाई समाधान नहीं निकाला गया और न ही यहां नया बोर खनन कराया गया।
बलानी चौक पर बढ़ा दबाव, अब कहीं नहीं आ रहा पानी
नगर पालिका ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बलानी चौक की पाइपलाइन को इन वार्डों से जोड़ तो दिया, लेकिन यह पैंतरा भी उल्टा पड़ गया। बलानी चौक के बोर पर पहले से ही कई मोहल्लों का भार था, अब अतिरिक्त वार्ड जुड़ जाने से वहां भी जल संकट खड़ा हो गया है। पाइपलाइन में फोर्स इतना कम है कि एक बाल्टी भरने में आधा घंटा लग रहा है, जिससे घरों की छत पर रखी टंकियां खाली पड़ी हैं।
दूषित पानी से सेहत से खिलवाड़
परेशानी सिर्फ पानी की कमी तक सीमित नहीं है। नलों से जो पानी आ रहा है, वह भीषण रूप से दूषित, गंदा और रेतीला है। कंकर-युक्त इस पानी के सेवन से वार्डवासियों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय निवासियों का सवाल है कि यदि इस दूषित पानी से महामारी फैलती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
गौरतलब है कि कलेक्टर ने गर्मी शुरू होने से पहले ही समीक्षा बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी जल स्रोतों और पाइपलाइनों को दुरुस्त रखा जाए। वहीं, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी प्रदेश भर में सुचारू जल आपूर्ति की चेतावनी दी थी। बावजूद इसके, मुंगेली नगर पालिका के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। प्रशासन के आदेश यहां सिर्फ कागजी साबित हो रहे हैं।
जन-आक्रोश: क्या बोले वार्डवासी?
राकेश जोशी (निवासी, राजेंद्र वार्ड) “पिछले एक महीने से नरक जैसी स्थिति है। पानी का फोर्स इतना कम है कि ऊपर तक चढ़ता ही नहीं। जो पानी आता है उसमें रेत और गंदगी भरी होती है। पार्षद और नगर पालिका में कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।”
ईश्वर देवांगन (निवासी, विवेकानंद वार्ड)“पुराना बोर पूरी तरह धंस चुका है। जब तक नया बोर नहीं होगा, समस्या हल नहीं होगी। हम लोग दूर-दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। नगर पालिका को हमारी तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है।”
फिलहाल, दोनों वार्डों में भारी आक्रोश व्याप्त है। यदि जल्द ही नया बोर खनन कर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई, तो वार्डवासी उग्र आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं।

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