मुंगेली /धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक वैभव और आपसी भाईचारे के अनूठे संगम के रूप में शहर में आयोजित हो रहे गणेशोत्सव के पावन पर्व के दौरान ‘मंगल मूर्ति गणेश उत्सव समिति’ द्वारा संचालित ग्यारह दिवसीय भव्य महाभंडारा अपनी अभूतपूर्व सफलता, उत्कृष्ट सुव्यवस्था और जन-जन के आकर्षण के केंद्र के रूप में पूरे क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, जिसके आज सफलतापूर्वक पाँच दिन पूर्ण हो चुके हैं और इन शुरुआती पाँच दिवसों में ही प्रतिदिन हज़ारों की संख्या में पधारे श्रद्धालुओं ने विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश के अलौकिक दर्शन करने के साथ-साथ इस पावन भंडारे का महाप्रसाद ग्रहण करके अपने जीवन को धन्य बनाया है|

समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं समर्पित कार्यकर्ताओं से प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, गणेशोत्सव के प्रथम दिवस से ही अत्यंत विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और गणपति बप्पा मोरया के गूंजते जयकारों के साथ इस विशाल भंडारे का शुभारंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग, आयु और तबके के लोगों को एक ही पंक्ति में बैठाकर महाप्रसाद की प्राप्ति कराना और सामाजिक समरसता का अद्वितीय संदेश देना है। इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अत्यंत अनुशासित समय-सारिणी और उच्चकोटि की प्रबंधन व्यवस्था है, जिसके तहत निर्धारित समयानुसार रोज़ दोपहर ठीक 2 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक अनवरत रूप से भंडारा संचालित किया जाता है, और इस दो घंटे की निर्धारित समयावधि के भीतर ही प्रतिदिन 1,000 से भी अधिक श्रद्धालु पूरी श्रद्धा, शालीनता और बिना किसी असुविधा के आराम से भोजन प्रसाद प्राप्त कर रहे हैं, जो समिति के सेवादारों की कार्यकुशलता और समर्पण का प्रत्यक्ष प्रमाण है।


इस महाभंडारे में परोसे जाने वाले प्रसाद की गुणवत्ता, स्वच्छता और उसकी लजीज विविधता हर आने वाले आगंतुक का मन मोह रही है, क्योंकि भगवान गणेश के चरणों में समर्पित इस प्रसाद को अत्यंत पवित्रता के साथ तैयार किया जा रहा है जिसमें दैनिक मुख्य व्यंजनों के रूप में गरमा-गरम और पौष्टिक दाल के साथ सुगंधित चावल परोसे जाते हैं जो हर थाली की शान बढ़ाते हैं, इसके साथ ही विशेष व्यंजनों में शाही स्वाद से भरपूर पनीर मिक्स वेज और पारंपरिक मसालों से सुवासित लजीज़ छोले तथा शुद्ध घी व तेल में ताज़ी तली हुई सुनहरी और कुरकुरी पूरियाँ परोसी जाती हैं जिनकी महक और स्वाद की प्रशंसा बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी एक स्वर में कर रहे हैं, और भोजन की इसी उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण न केवल स्थानीय नागरिक बल्कि दूर-दराज के इलाकों और आसपास के गाँवों से भी सपरिवार लोग इस भंडारे में सम्मिलित होने पहुँच रहे हैं जिससे पंडाल का पूरा माहौल एक विशाल उत्सव में परिवर्तित हो गया है।

यह 11 दिवसीय अनुष्ठान केवल भोजन वितरण का माध्यम भर नहीं है, अपितु यह आपसी भाईचारे, जाति-पाँति के बंधनों से ऊपर उठकर समानता की भावना को मज़बूत करने वाला एक महान सामाजिक अनुष्ठान बन चुका है जहाँ हर रोज़ लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं और एक-दूसरे के सुख-दुःख साझा करते हैं। इस बीच, उत्सव के पाँच दिन बीत जाने के बाद अब सभी की निगाहें आगामी अंतिम दिनों और विशेष तौर पर इस ग्यारह दिवसीय अनुष्ठान के अंतिम यानी 11वें दिन के कार्यक्रमों पर टिकी हुई हैं, जिसके संदर्भ में समिति ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण एवं सराहनीय घोषणा करते हुए यह स्पष्ट किया है कि 11वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी या समापन के विशेष अवसर पर भंडारे का स्वरूप केवल दो घंटों का नहीं रहेगा, बल्कि उस दिन प्रातः काल से लेकर देर रात्रि तक पूरे दिन अनवरत रूप से महाप्रसाद की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहेगी ताकि विसर्जन यात्रा में शामिल होने वाले, दूर-दराज से आने वाले तथा शहर के कोने-कोने से पधारने वाले हज़ारों-लाखों श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और वे आसानी से बप्पा का आशीर्वाद लेकर महाप्रसाद ग्रहण कर सकें। समिति के सभी सदस्य, युवा स्वयंसेवक और पदाधिकारी इस ऐतिहासिक आयोजन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए दिन-रात अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, और अंत में मंगल मूर्ति गणेश उत्सव समिति ने शहर के समस्त धर्मप्रेमियों, श्रद्धालुओं, दानदाताओं और नागरिकों से सादर एवं विनम्र अपील की है कि वे अधिक से अधिक ।

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