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बिलासपुर / शहर के वार्ड क्रमांक 66 स्थित फ्रेंड्स रेजीडेंसी कॉलोनी में बिल्डर के बंद पड़े दफ्तर पर सोसाइटी के अध्यक्ष और दिग्गज कांग्रेसी नेता अर्जुन तिवारी द्वारा कब्जा कर उसे चौकीदार के निवास हेतु रिनोवेट कराने, इस प्रक्रिया में बिल्डर के सामानों व जर्जर ढांचे को हटाए जाने पर बिल्डर द्वारा दर्ज कराई गई कड़ी आपत्ति, दोनों पक्षों के बीच उपजे तीखे विवाद, वर्ष 2018 में नगर निगम बिलासपुर द्वारा इस पूरी कॉलोनी को अपने प्रशासनिक नियंत्रण में लिए जाने के तकनीकी व कानूनी पहलुओं, नगर निगम के टेकओवर के बाद सार्वजनिक स्थलों और बिल्डर की निजी संपत्तियों के स्वामित्व को लेकर उत्पन्न हुई वैधानिक अनिश्चितताओं, स्थानीय नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं व कॉलोनी की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के नाम पर सोसाइटी द्वारा किए गए इस कथित जनहितैषी कार्य के पीछे छिपे वास्तविक इरादों, पंद्रह वर्षों से बंद पड़े इस जर्जर दफ्तर की दीवारों के दरकने व छज्जे टूटने से सड़ चुके कुर्सी-अलमारी व रसीद बुक जैसे दस्तावेजों के नष्ट होने की भौतिक स्थिति, इस विवाद के बाद बिल्डर द्वारा बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय में सौंपे गए लिखित शिकायत पत्र, मामले के अत्यधिक हाई-प्रोफाइल होने तथा आरोपी पक्ष के राजनीतिक रसूख व सत्ता तंत्र में मजबूत पैठ होने के कारण पुलिस प्रशासन द्वारा मामले को दीवानी (सिविल) प्रकृति का बताकर एफआईआर दर्ज करने में की जा रही टालमटोल व ढुलमुल रवैए, स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर गरमाती राजनीति, नगर निगम प्रशासन की इस पूरे घटनाक्रम पर रहस्यमयी चुप्पी, और आने वाले समय में इस मामले के न्यायालय की चौखट पर पहुंचने की प्रबल संभावनाओं तथा बिलासपुर के भू-माफिया व रसूखदार नेताओं के बीच के इस नए कानूनी गतिरोध को रेखांकित करती यह विस्तृत खोजी समाचार रिपोर्ट बिलासपुर के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा भूचाल लेकर आई है, जिसने शहरी विकास नियमों और रसूखदारों के आपसी टकराव को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है।

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