मुंगेली। मध्य प्रदेश के रीवा शहर में घटित एक अत्यंत भीषण और हृदयविदारक सड़क हादसे में जैन समाज की दो परम पूज्य, तपस्विनी साध्वियों—आर्यिका श्री 105 श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका श्री उपशममति माताजी का असामयिक और अत्यंत दुखद समाधिमरण हो गया, जिसने न केवल जैन धर्म के अनुयायियों को बल्कि संपूर्ण मानव समाज और अध्यात्म जगत को झकझोर कर रख दिया है। जैन धर्म के अत्यंत कठिन और कठोर व्रतों का पालन करते हुए, आजीवन किसी भी प्रकार के वाहन, सुख-सुविधाओं और चप्पल-जूतों का त्याग कर, कड़कती धूप, हाड़ कंपाने वाली ठंड और मूसलाधार बारिश में भी केवल जन-कल्याण और आत्म-कल्याण की भावना से नंगे पैर निरंतर पदविहार करने वाले इन वीतरागी संतों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई यह दर्दनाक दुर्घटना आधुनिक व्यवस्था और बेलगाम यातायात प्रणाली पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। इस भीषण वज्रपात की खबर जैसे ही देश के कोने-कोने में फैली, संपूर्ण जैन समाज गहरे शोक, स्तब्धता और असीम वेदना में डूब गया, जिसके बाद समाज के शीर्ष पथ-प्रदर्शक, प्रखर वक्ता राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज एवं वात्सल्य वारिधि मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज ने इस गंभीर विषय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन का आह्वान किया। पूज्य गुरुदेव द्वय के पावन निर्देशानुसार और जैन समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधि अनूप जैन द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पूरे देश के दिगंबर और श्वेतांबर जैन समाज को एक निश्चित तिथि पर एकजुट होकर देश के सर्वोच्च पदों पर आसीन जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का निर्देश प्राप्त हुआ था, जिसके तहत देश के माननीय राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री एवं प्रत्येक प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्रियों के नाम एक स्पष्ट, सुदृढ़ और कड़े शब्दों में लिखित ज्ञापन तैयार किया गया, जिसमें समाज ने पूरी दृढ़ता के साथ मांग रखी कि अहिंसा और अपरिग्रह के मार्ग पर चलने वाले जैन साधु एवं साध्वियों की सुरक्षा के लिए सरकारें पूर्णतः वचनबद्ध हों और उनकी पदविहार चर्या को सुरक्षित बनाने हेतु विशेष सुरक्षा कानून, राजमार्गों पर ‘संत विहार कॉरिडोर’ का निर्माण, गति सीमा का कड़ाई से पालन और संतों के आगमन की पूर्व सूचना पर स्थानीय पुलिस द्वारा सुरक्षा घेरा (Escort) प्रदान करने जैसे ठोस व व्यावहारिक कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में किसी भी संत को इस तरह की क्रूर दुर्घटना का शिकार न होना पड़े। इसी राष्ट्रव्यापी और ऐतिहासिक आह्वान के अनुपालन में, छत्तीसगढ़ के मुंगेली शहर में भी सकल जैन समाज के भीतर एक अभूतपूर्व एकजुटता, धार्मिक निष्ठा और अपने गुरुओं के प्रति अटूट समर्पण का दृश्य देखने को मिला, जहाँ समाज के समस्त पुरुषों, युवाओं, वृद्धों और भारी संख्या में मातृशक्ति (महिला वर्ग) ने अपने सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों, दुकानों और दैनिक गृह-कार्यों को पूर्णतः बंद रखकर इस गंभीर मुहिम में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। मुंगेली शहर के स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर परिसर से प्रारंभ हुई यह ऐतिहासिक मौन रैली शहर के विभिन्न व्यस्ततम, प्रमुख और ऐतिहासिक मार्गों से गुजरी, जिसकी सबसे बड़ी और अनुकरणीय विशेषता यह थी कि हजारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ने के बावजूद वहां न तो कोई कोलाहल था, न ही कोई राजनीतिक नारेबाजी हो रही थी, बल्कि पुरुष वर्ग मर्यादित सफेद वस्त्रों में और महिला वर्ग सलीके की साड़ियों में हाथों में “हमारे संत हमारी धरोहर हैं, इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करो” और “रीवा के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दो” जैसी न्यायसंगत मांगों की तख्तियां लिए, परम शांति और पूर्ण अनुशासन के साथ दो-दो की कतारों में मौन धारण किए कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहे थे, जिसे देखकर संपूर्ण मुंगेली नगरवासी स्तब्ध रह गए और उन्होंने समाज के इस मौन आक्रोश व संतों के प्रति अगाध श्रद्धा को अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखा। यह विशाल, अनुशासित और गरिमापूर्ण मौन जुलूस नगर के मुख्य चौराहों से गुजरता हुआ अंततः जिला कलेक्टर कार्यालय (कलेक्ट्रेट परिसर) पहुंचा, जहाँ कलेक्ट्रेट के प्रांगण में समाज के वरिष्ठ प्रबुद्ध जनों ने इस घटना की विभीषिका और जैन संतों की कठोर चर्या की संवेदनशीलता पर संक्षिप्त रूप से प्रकाश डाला, तत्पश्चात जैन समाज के एक प्रतिष्ठित और वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के भीतर जाकर मुंगेली की एडिशनल कलेक्टर (ADM) मैडम निष्ठा पांडे से अत्यंत गंभीर माहौल में मुलाकात की और उन्हें महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री तथा प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के नाम संबोधित वह विस्तृत और स्पष्ट लिखित ज्ञापन सौंपा जिसमें जैन गुरुओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की गई थी। ज्ञापन स्वीकार करते हुए और जैन समाज के इस अनुशासित व शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की गरिमा को देखते हुए एडीएम मैडम निष्ठा पांडे ने समाज की गहरी वेदना और संवेदनशीलता को पूरी आत्मीयता से महसूस किया तथा उन्होंने उपस्थित समाज जनों को पूर्ण रूप से आश्वस्त और ढांढस बंधाया कि जैन समाज की इन अत्यंत जायज, महत्वपूर्ण और संतों की सुरक्षा से जुड़ी मांगों को वे बिना किसी प्रशासनिक विलंभ के, त्वरित गति से उचित माध्यम का उपयोग करते हुए महामहिम राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री सचिवालय तक प्रेषित करेंगी ताकि शासन स्तर पर इस विषय में कोई ठोस नीतिगत निर्णय लिया जा सके। इस संपूर्ण घटनाक्रम और मुंगेली सहित पूरे भारतवर्ष में हुए इस अभूतपूर्व आंदोलन ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जैन समाज भले ही अल्पसंख्यक, शांतिप्रिय और कानून का पालन करने वाला समुदाय है, परंतु जब बात उनके परम पूज्य संतों की सुरक्षा और अस्मिता पर आएगी, तो पूरा समाज अपने पूज्य गुरुदेवों के मार्गदर्शन में वैधानिक और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रहकर अपनी आवाज को देश के सर्वोच्च पटल तक पहुँचाने की पूरी शक्ति रखता है, और अब यह समय की मांग है कि सरकारें इस दर्दनाक रीवा हादसे से सबक लेते हुए जैन साधु-साध्वियों के सुरक्षित पदविहार के लिए तत्काल प्रभाव से जमीनी स्तर पर कड़े कदम उठाएं, जो हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और अहिंसात्मक धरोहर की रक्षा के लिए अत्यंत अनिवार्य है, और इसी जन-आंदोलन व देशव्यापी एकजुटता के बीच संपूर्ण राष्ट्र अपनी दोनों दिवंगत पूज्य आर्यिका माताओं के चरणों में बारंबार नमन करते हुए उनके पावन समाधिमरण पर अश्रुपूर्ण और गहरी विनयांजलि अर्पित करता है।

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