मुंगेली/ छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने सख्त और सक्रिय रुख अपना लिया है। इसी क्रम में शनिवार को मुंगेली जिले के कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। इस आकस्मिक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का जमीनी स्तर पर आकलन करना, चिकित्सकों एवं मैदानी अमले की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करना और स्वास्थ्य ढांचे में आ रही कमियों को तत्काल दूर करना था। कलेक्टर के इस औचक दौरे से अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया, वहीं आम नागरिकों और मरीजों ने इस प्रशासनिक सक्रियता की सराहना की है।
मरीजों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च दायित्व
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर तोपनो ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिला चिकित्सालय जिले की सबसे बड़ी और प्रमुख स्वास्थ्य संस्था है। यहां प्रतिदिन ग्रामीण और सुदूर अंचलों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में गरीब और जरूरतमंद मरीज अपने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इन मरीजों को बेहतर, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हम सबकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शासन की मंशा है कि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचे और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ओपीडी और चिकित्सकीय कक्षों का गहन निरीक्षण
कलेक्टर ने सबसे पहले आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) का रुख किया। वहां उन्होंने विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों के कक्षों का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण किया और रोस्टर के अनुसार चिकित्सकों एवं अन्य मेडिकल स्टाफ की उपस्थिति का उपस्थिति पंजी से मिलान किया। उन्होंने चिकित्सकों से मरीजों की दैनिक संख्या, उनके लक्षणों और दी जा रही प्राथमिक उपचार की जानकारियों पर चर्चा की। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि ओपीडी में आने वाले प्रत्येक मरीज का मनोयोग से परीक्षण किया जाए और उन्हें अनावश्यक रूप से लंबी लाइनों में न खड़ा रहना पड़े, इसके लिए सुचारू कतार प्रबंधन लागू किया जाए।

जांच इकाइयों और जीवनरक्षक सेवाओं की परिकल्पना
जिला अस्पताल के तकनीकी और डायग्नोस्टिक विभागों का जायजा लेते हुए कलेक्टर तोपनो ने सीटी स्कैन कक्ष, एक्स-रे यूनिट, सोनोग्राफी सेंटर, सेंट्रल ड्रग स्टोर, आपातकालीन (इमरजेंसी) यूनिट, डायलिसिस सेवा केंद्र, आईसीयू (सघन चिकित्सा इकाई), पैथोलॉजी लैब और ब्लड बैंक का सघन निरीक्षण किया।
सीटी स्कैन और सोनोग्राफी: उन्होंने तकनीशियनों से कहा कि जांच मशीनों का रखरखाव नियमित रूप से हो ताकि मरीजों को बाहर निजी सेंटरों का रुख न करना पड़े।
सेंट्रल ड्रग स्टोर: दवा वितरण काउंटर और ड्रग स्टोर का निरीक्षण करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि चिकित्सकों द्वारा लिखी जाने वाली सभी आवश्यक और जीवनरक्षक दवाइयां अस्पताल परिसर के भीतर ही मरीजों को नि:शुल्क अथवा रियायती दरों पर समय पर मिलनी चाहिए। बाहर से दवाइयां खरीदने की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।
आपातकालीन एवं डायलिसिस यूनिट: गंभीर मरीजों के इलाज में एक पल की भी देरी न हो, इसके लिए इमरजेंसी वार्ड और डायलिसिस यूनिट को पूरी तरह से क्रियाशील रखने के निर्देश दिए गए।
अस्पताल परिसर की साफ-सफाई और स्वच्छता पर विशेष जोर
कलेक्टर तोपनो ने अस्पताल के वार्डों, इंडोर मरीजों के कमरों, गलियारों, प्रतीक्षा कक्षों और शौचालयों की साफ-सफाई व्यवस्था का सूक्ष्म निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सा संस्थान में स्वच्छता का स्तर सबसे ऊंचा होना चाहिए, क्योंकि गंदे और संदूषित वातावरण से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने संबंधित सफाई एजेंसी और अस्पताल के स्वच्छता प्रभारियों को कड़ी हिदायत दी कि परिसरों में निरंतर सफाई बनाए रखी जाए और कचरे का सुरक्षित निपटान सुनिश्चित किया जाए।
मातृ एवं शिशु अस्पताल (100 बिस्तर) का विशेष जायजा
जिला चिकित्सालय के मुख्य परिसर के पश्चात कलेक्टर ने 100 बिस्तर वाले मातृ एवं शिशु अस्पताल का रुख किया। यहां महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया गया।
ओपीडी और लेबर रूम: प्रसव कक्ष (लेबर रूम) की कार्यप्रणाली का निरीक्षण करते हुए उन्होंने सुरक्षित प्रसव के सभी मानकों का कड़ाई से पालन करने को कहा।
एसएनसीयू और पीडियाट्रिक वार्ड: नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (SNCU) और बाल रोग वार्ड में बच्चों के स्वास्थ्य की देखरेख के लिए तैनात स्टाफ को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए।
एनआरसी और ऑपरेशन थिएटर: पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) और ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए उन्होंने मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए।
ड्यूटी में लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
स्वास्थ्य सेवाएं सीधे तौर पर मानव जीवन और बहुमूल्य जिंदगियों से जुड़ी हुई हैं। इस वास्तविकता को रेखांकित करते हुए कलेक्टर ने चेतावनी दी कि अस्पताल में पदस्थ कोई भी चिकित्सक, नर्स या अन्य प्रशासनिक कर्मचारी अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाह न रहें। सभी कर्मचारियों का निर्धारित समय पर अपनी कार्यस्थली पर उपस्थित रहना अनिवार्य है। उन्होंने अस्पताल अधीक्षक और सिविल सर्जन को निर्देशित किया कि वे कर्मचारियों की उपस्थिति की बायोमेट्रिक और भौतिक रूप से नियमित निगरानी करें। यदि निरीक्षण के दौरान कोई कर्मचारी अनुपस्थित पाया जाता है या अपने कर्तव्यों के निर्वहन में उदासीनता बरतता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
बुनियादी ढांचे और परिसर की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देश

निरीक्षण के दौरान अस्पताल के भौतिक ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कुछ कमियां भी सामने आईं, जिन पर कलेक्टर ने तुरंत संज्ञान लिया:
बाउंड्रीवाल का निर्माण: अस्पताल परिसर की सुरक्षा और बाहरी तत्वों के अनावश्यक प्रवेश को रोकने के लिए अस्पताल के चारों ओर मजबूत बाउंड्रीवाल का निर्माण कराने के निर्देश दिए गए।
सीपेज की समस्या का समाधान: भवन के विभिन्न कक्षों और दीवारों में हो रहे सीपेज (नमी और पानी रिसाव) का समयबद्ध तरीके से तकनीकी निराकरण कराने को कहा गया ताकि भवनों की उम्र लंबी बनी रहे।
सुव्यवस्थित पार्किंग: अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के वाहनों के लिए पार्किंग स्थल को सुव्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए ताकि मुख्य रास्तों पर जाम की स्थिति न बने।
परिसर में मवेशियों का प्रवेश और नाराजगी: अस्पताल परिसर के भीतर गायों और अन्य आवारा मवेशियों के प्रवेश पर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इस व्यवस्था में चूक के लिए संबंधित सुरक्षा गार्ड को तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में परिसर में कोई मवेशी प्रवेश न कर सके और सुरक्षा गार्ड अपनी ड्यूटी पूरी मुस्तैदी से निभाएं।
सकारात्मक संवाद और शुभकामनाएं
निरीक्षण के अंत में कलेक्टर तोपनो ने अस्पताल के सुचारू संचालन और आम जनता को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में जुटे सभी चिकित्सा अधिकारियों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने सभी को प्रेरित किया कि वे टीम भावना के साथ कार्य करें और मुंगेली जिला चिकित्सालय को प्रदेश के श्रेष्ठ अस्पतालों की श्रेणी में लाएं।
इस उच्चस्तरीय निरीक्षण के दौरान मुंगेली के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अजय शतरंज, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) तथा प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. शीला साहा, डीपीएम गिरीश कुर्रे, बीएमओ डॉ. कमलेश खैरवार, आरएमओ डॉ. संदीप कुमार पाटिल सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ चिकित्सक, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।
मुंगेली जिला प्रशासन की यह कार्रवाई दर्शाती है कि शासन आम जनता के स्वास्थ्य के प्रति कितना गंभीर है। इस औचक निरीक्षण से न केवल अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद जगी है, बल्कि मैदानी स्तर पर कर्मचारियों में जिम्मेदारी का भाव भी मजबूत हुआ है।


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