बिलासपुर/छत्तीसगढ़ के पुलिस महकमे, प्रशासनिक गलियारों और आम जनमानस में उस वक्त एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया, जब सोशल मीडिया के प्रमुख माध्यमों पर बिलासपुर पुलिस प्रशासन तथा सरकंडा थाना प्रभारी के खिलाफ लगभग 200 करोड़ रुपये की अकूत, बेनामी व अवैध संपत्ति होने के सनसनीखेज दावे तेजी से प्रसारित होने लगे। फेसबुक और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ‘शिवराज सिंह श्रीनेत’ नामक व्यक्ति द्वारा लगातार किए जा रहे इन गंभीर आरोपों ने न केवल बिलासपुर जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस महकमे की साख को कठघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि राज्य के गृह विभाग की प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता, सार्वजनिक क्षेत्र में विभागीय प्रतिष्ठा को पहुंच रहे नुकसान और आम जनता में पनप रहे असंतोष को देखते हुए बिलासपुर (27 खोली) निवासी राहुल साहू ने सीधे छत्तीसगढ़ शासन के उप-मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के समक्ष एक विस्तृत और औपचारिक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शिकायत आवेदन का त्वरित संज्ञान लेते हुए उप-मुख्यमंत्री कार्यालय (गृह एवं जेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग) ने बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को मामले की गहन छानबीन करने, नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने और इसकी विस्तृत रिपोर्ट शासन को प्रेषित करने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया है।
विवाद की मुख्य जड़ फेसबुक पर सार्वजनिक रूप से पोस्ट किए गए वे आपत्तिजनक वीडियो और सामग्री हैं, जिनमें बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) और सरकंडा थाना प्रभारी के पास करीब 200 करोड़ रुपये की अकूत संपत्ति और नकदी का जखीरा होने की बात कही गई थी। शिवराज सिंह श्रीनेत द्वारा अपने फेसबुक हैंडल से जून और जुलाई महीनों के दौरान सिलसिलेवार तरीके से कई पोस्ट और वीडियो अपलोड किए गए, जिनमें बिलासपुर पुलिस की कार्यप्रणाली और उनकी ईमानदारी पर तीखे प्रहार किए गए। इन वायरल पोस्टों में कई तरह की तस्वीरें और मीडिया रिपोर्ट्स के स्क्रीनशॉट भी संलग्न किए गए थे, जिससे आम जनता के बीच पुलिस विभाग के प्रति गहरा अविश्वास पैदा हो गया। हालांकि, इन गंभीर दावों के साथ आरोप लगाने वाले पक्ष द्वारा कोई भी आधिकारिक, सत्यापित या प्रामाणिक राजस्व/वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया था। इसके कारण स्थिति और अधिक जटिल हो गई, क्योंकि एक तरफ जहां भ्रष्टाचार की खबरें हवा में तैरने लगीं, वहीं दूसरी तरफ कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों की व्यक्तिगत व विभागीय साख को बिना किसी अदालती या कानूनी पुष्टि के भारी क्षति पहुंचने लगी।


मामले में नागरिक के रूप में हस्तक्षेप करते हुए शिकायतकर्ता राहुल साहू ने गृह मंत्री के नाम लिखे अपने पत्र में बहुपक्षीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए एक संतुलित जांच की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि बिना किसी पूर्व सत्यापन या ठोस सबूत के यदि सोशल मीडिया जैसे सार्वजनिक मंचों पर इस प्रकार के 200 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति के दावे प्रसारित किए जाते हैं, तो इससे न केवल संबंधित पुलिस अधिकारियों का चरित्र हनन होता है, बल्कि कानून लागू करने वाली संस्थाओं के प्रति आम नागरिकों का भरोसा भी पूरी तरह डगमगा जाता है। साहू ने शासन से मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगें रखीं—पहला, यदि आरोप लगाने वाले व्यक्ति के पास अपने दावों को साबित करने के लिए ठोस सबूत मौजूद हैं, तो उन्हें जांच अधिकारी के समक्ष तत्काल प्रस्तुत कराने के लिए पाबंद किया जाए। दूसरा, सभी संबंधित फेसबुक पोस्ट, वीडियो और डिजिटल सामग्रियों को वैधानिक प्रक्रिया के तहत सुरक्षित कर उनके स्रोतों और प्रामाणिकता की पड़ताल की जाए। तीसरा, यदि जांच के बाद ये सभी आरोप पूरी तरह असत्य, भ्रामक, कल्पित या बिना साक्ष्य के पाए जाते हैं, तो सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर पुलिस प्रशासन की छवि खराब करने की मंशा रखने वाले व्यक्ति के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत सख्त कानूनी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए।
गृह विभाग और उप-मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले को अत्यधिक गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक निष्पक्षता का परिचय दिया है। उप-मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) विकास कुमार चौधरी के हस्ताक्षर से प्रेषित निर्देश पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि मामले का संपूर्ण परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और आवेदक को भी इसके परिणामों से अवगत कराया जाए। इसके साथ ही, इस पत्र की एक अधिकृत प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक (DGP), पुलिस मुख्यालय (PHQ), अटल नगर, नवा रायपुर को भी सूचनार्थ और आवश्यक पर्यवेक्षण हेतु भेजी गई है। शासन के इस कड़े रुख के बाद बिलासपुर पुलिस रेंज और साइबर क्राइम सेल में हलचल तेज हो गई है। गृह विभाग के इस निर्णय से यह साफ संदेश गया है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के किसी भी मामले को दबाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन साथ ही वह सोशल मीडिया के जरिए बिना किसी साक्ष्य के अधिकारियों का मीडिया ट्रायल करने या उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी। प्रशासनिक हलकों में इस आदेश को पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फिलहाल, उप-मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में बिलासपुर रेंज आईजी कार्यालय द्वारा पूरे मामले की विस्तृत और तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक विशेष टीम को शिवराज सिंह श्रीनेत द्वारा पोस्ट की गई डिजिटल सामग्रियों, वीडियो फुटेज और उनके द्वारा दिए गए बयानों के मूल स्रोतों (Sources) की गहराई से पड़ताल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच टीम मुख्य रूप से दो प्रमुख बिंदुओं पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है—पहला, क्या वायरल वीडियो में लगाए गए 200 करोड़ रुपये की संपत्ति के आरोपों में कोई प्राथमिक सच्चाई या वित्तीय साक्ष्य छिपा है, और दूसरा, क्या यह पूरी कवायद बिलासपुर पुलिस तथा सरकंडा थाना प्रभारी को किसी व्यक्तिगत या दुर्भावनापूर्ण मंशा से निशाना बनाने के लिए रची गई थी। बिलासपुर पुलिस रेंज द्वारा गठित जांच दल जल्द ही सभी पक्षों के बयान दर्ज कर और साइबर साक्ष्यों का परीक्षण कर अपनी विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट शासन को सौंपेगा, जिसके आधार पर आगे की कठोर कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

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