मुंगेली / शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय फास्टरपुर में आज संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और विद्यार्थियों के भीतर इस प्राचीन भाषा के प्रति गहरी रुचि जागृत करने के पावन उद्देश्य के साथ संस्कृत सप्ताह दिवस मनाने की औपचारिक घोषणा की गई। इस विशेष आयोजन को लेकर विद्यालय परिसर में सुबह से ही एक अलग और ऊर्जावान माहौल देखने को मिला, जहाँ शिक्षक-शिक्षिकाओं और छात्र-छात्राओं ने पूरे हर्षोल्लास के साथ अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत रूप से मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना, धूप और दीप प्रज्वलन के साथ की गई, जिससे पूरा प्रांगण सकारात्मक ऊर्जा से भर गया।


विद्यालय की प्राचार्य डॉ. पूर्णिमा मिश्रा ने मां सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्वलित कर संस्कृत सप्ताह दिवस के आयोजनों के आरंभ की आधिकारिक घोषणा की। इस अवसर पर अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा केवल संवाद का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी भारतीय संस्कृति, प्राचीन ज्ञान और संस्कारों की सबसे अमूल्य धरोहर है। उन्होंने विस्तार से बताया कि आज की आधुनिक जीवनशैली और शिक्षा प्रणाली के बीच संस्कृत का ज्ञान विद्यार्थियों के मानसिक विकास और नैतिक चरित्र निर्माण में एक मजबूत आधारशिला का काम करता है। संस्कृत सप्ताह के इस पूरे आयतन के माध्यम से विद्यालय के सभी बच्चों को इस महान भाषा के ऐतिहासिक और व्यावहारिक महत्व से परिचित कराया जाएगा, ताकि वे इसकी गहराई को समझ सकें। इसके साथ ही सप्ताह भर चलने वाले इन आयोजनों के दौरान विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक, रचनात्मक एवं शैक्षणिक गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की गई है, जिनमें छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के संस्कृत व्याख्याता डॉ. रामबाबू मिश्र ने अपने विचार रखते हुए संस्कृत भाषा की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत देववाणी है और यह संपूर्ण विश्व की अत्यंत प्राचीन, वैज्ञानिक तथा सबसे समृद्ध भाषाओं में से एक गिनी जाती है। मानव सभ्यता के विकास में संस्कृत का योगदान अतुलनीय रहा है। दुनिया की अनेक आधुनिक भाषाओं की उत्पत्ति, उनके शब्द और उनकी शब्द-रचना प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संस्कृत भाषा से ही प्रभावित और पोषित हुई है। उन्होंने बड़े ही प्रेरणादायक शब्दों में विद्यालय के सभी विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की इस अमूल्य थाती के अध्ययन, संवर्धन और प्रसार के लिए आगे आएं। उनके इस प्रेरक वक्तव्य ने उपस्थित विद्यार्थियों में एक नई उमंग भर दी।
संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत विद्यालय में आगामी दिनों में कई प्रकार की आकर्षक और ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से संस्कृत संभाषण (बोलचाल का अभ्यास), श्लोक वाचन, संस्कृत गीत गायन, भाषण प्रतियोगिता, निबंध लेखन, सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी और अन्य विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल किए गए हैं। इन प्रतियोगिताओं का मुख्य उद्देश्य बच्चों के भीतर से भाषा का संकोच और झिझक पूरी तरह दूर करना है, ताकि वे बेझिझक संस्कृत में संवाद कर सकें और इसके व्याकरण तथा उच्चारण की बारीकियों को भली-भांति आत्मसात कर सकें।
इस भव्य आयोजन की घोषणा और उद्घाटन अवसर पर विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों की सक्रिय उपस्थिति रही। विद्यालय के शिक्षक और शिक्षिकाओं में कमलेश भास्कर, कविता उपाध्याय, कु. ऐश्वर्या यादव, नीलिमा किरण मिंज, रंजनी कश्यप, झरोखा लाल मिरि, देवेंद्र पटेल, दीपक गुप्ता, भूपेंद्र कुर्रे और टीकाराम ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए इस संपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में अपना पूरा सहयोग प्रदान किया। शिक्षकों के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के कारण ही विद्यालय के छात्र-छात्राओं में संस्कृत सप्ताह को लेकर एक विशेष प्रकार का उत्साह और उल्लास साफ-साफ देखा जा सकता था। बच्चे अभी से अपनी पसंदीदा प्रतियोगिताओं जैसे श्लोक वाचन और निबंध लेखन के लिए अपनी तैयारियों में जुट गए हैं।
इस प्रकार शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय फास्टरपुर में आयोजित होने वाला यह संस्कृत सप्ताह विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, संस्कृति और संस्कारों का एक अनूठा संगम साबित होने जा रहा है, जो आने वाले दिनों में क्षेत्र में शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता की एक नई मिसाल पेश करेगा।

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