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रायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार, 19 मार्च 2026 को एक बेहद गहमागहमी भरे सत्र के दौरान ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया यह विधेयक राज्य के 58 साल पुराने (1968 के) कानून की जगह लेगा इस महत्वपूर्ण विधेयक को छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन के पटल पर रखा।
कड़े दंड का प्रावधान: जेल और भारी जुर्माना
नए विधेयक के तहत सजा के प्रावधानों को अत्यंत कठोर बनाया गया है। सरकार का तर्क है कि पुराने कानून में सजा कम होने के कारण अपराधी बेखौफ थे। नए प्रावधान इस प्रकार हैं:
- सामूहिक धर्मांतरण: यदि दो या दो से अधिक व्यक्तियों का एक साथ धर्मांतरण कराया जाता है, तो दोषियों को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। साथ ही न्यूनतम 25 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा।
- विशेष श्रेणियाँ: नाबालिगों, महिलाओं, मानसिक रूप से निःशक्त व्यक्तियों या SC/ST वर्ग के लोगों के अवैध धर्मांतरण के मामले में 10 से 20 वर्ष की जेल और 10 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
- सामान्य मामले: अन्य मामलों में 7 से 10 वर्ष की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना तय किया गया है।
- मुआवजा: कानून में पीड़ित को 10 लाख रुपये तक का मुआवजा दिलाने का भी प्रावधान है, जो दोषी को देना होगा।
धर्मांतरण की प्रक्रिया और ‘डिजिटल’ निगरानी
अब राज्य में स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए भी नियम कड़े कर दिए गए हैं।
- पूर्व सूचना: धर्म बदलने के इच्छुक व्यक्ति और संबंधित धार्मिक गुरु (पादरी, मौलवी या पंडित) को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को लिखित सूचना देनी होगी।
- सार्वजनिक घोषणा: सूचना मिलने के 7 दिनों के भीतर प्रशासन इस जानकारी को सार्वजनिक करेगा ताकि 30 दिनों के भीतर कोई भी आपत्ति दर्ज करा सके।
- डिजिटल दायरा: पहली बार सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए किए जाने वाले धर्मांतरण या प्रलोभन को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है।
विपक्ष का विरोध और सरकार का पक्ष
विधेयक पेश करते समय सदन में तीखी बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने इसे ‘प्रवर समिति’ के पास भेजने की मांग की, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने खारिज कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधेयक पारित होने के बाद कहा:
“यह कानून किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि उन लोगों के खिलाफ है जो हमारी भोली-भाली जनता की गरीबी और अज्ञानता का फायदा उठाकर उनका सौदा करते हैं। बस्तर से लेकर सरगुजा तक, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा हमारा संकल्प है।”
प्रमुख बिंदु जो आपको जानने चाहिए
- घर वापसी: विधेयक स्पष्ट करता है कि अपने मूल या पूर्वजों के धर्म में वापस लौटना ‘धर्मांतरण’ की श्रेणी में नहीं आएगा।
- विदेशी फंडिंग: धर्मांतरण के लिए विदेशी धन का उपयोग करने वाली संस्थाओं के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
- विशेष अदालतें: मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा, जहाँ 6 महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य होगा।

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