रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर अब केवल स्थानीय अपराधियों के निशाने पर नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े ड्रग तस्करों ने भी इसे अपना बड़ा बाजार बना लिया था। रायपुर पुलिस ने एक बेहद चौंकाने वाले और खतरनाक ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार सीधे पाकिस्तान सीमा से जुड़े हुए हैं। पुलिस ने पंजाब के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर 4 शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया है, जो हेरोइन की तस्करी के इस काले कारोबार को संचालित कर रहे थे।
कैसे होता था ‘सफेद जहर’ का कारोबार?
पुलिस की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय हैं। यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। गिरोह के सदस्य पंजाब के उन सीमावर्ती इलाकों से हेरोइन की खेप उठाते थे, जो पाकिस्तान की सीमा से सटे हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करोड़ों की कीमत रखने वाली हेरोइन, इन्हें बॉर्डर इलाकों में मात्र 1200 से 1300 रुपये प्रति ग्राम की कीमत पर मिल जाती थी।
यही ‘सफेद जहर’ जब छत्तीसगढ़ और खासकर रायपुर पहुँचता था, तो इसकी कीमत सात गुना तक बढ़ जाती थी। रायपुर में यह गिरोह इसे 8000 रुपये प्रति ग्राम की दर से नशेड़ियों और छोटे पैडलर्स को बेचता था। मुनाफे का यह विशाल अंतर ही इस गिरोह के फलने-फूलने की मुख्य वजह थी।
ट्रक और कुरियर: तस्करी का नया रूट
आरोपी सीधे तौर पर ड्रग्स लेकर नहीं चलते थे, बल्कि उन्होंने पकड़े जाने से बचने के लिए एक ‘सेफ रूट’ तैयार कर रखा था। पंजाब से खेप मिलने के बाद, उसे रायपुर तक पहुँचाने के लिए ट्रक ड्राइवरों का सहारा लिया जाता था। मालवाहक ट्रकों के गुप्त केबिनों में नशा छिपाकर छत्तीसगढ़ लाया जाता था। इतना ही नहीं, पुलिस को चकमा देने के लिए यह सिंडिकेट देशभर में सप्लाई के लिए कुरियर सेवाओं का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहा था। छोटे-छोटे पैकेटों में नशीले पदार्थ पैक कर उन्हें आम पार्सल की तरह गंतव्य तक पहुँचाया जाता था।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा
रायपुर पुलिस को पिछले कुछ समय से शहर में हेरोइन की बढ़ती उपलब्धता की सूचना मिल रही थी। मुखबिरों के जाल और तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस की एक विशेष टीम पंजाब रवाना की गई। वहां स्थानीय पुलिस की मदद से घेराबंदी कर सिंडिकेट के 4 मुख्य आरोपियों को दबोच लिया गया।
पुलिस महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह केवल एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि एक बड़े नेटवर्क की कमर तोड़ना है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि:
- रायपुर में इनके स्थानीय संपर्क (Local Contacts) कौन-कौन हैं?
- क्या इस पैसे का इस्तेमाल किसी अन्य देश विरोधी गतिविधियों में तो नहीं किया जा रहा था?
- कुरियर कंपनियों की इसमें क्या भूमिका है और क्या उन्हें इस तस्करी की भनक थी?
समाज पर प्रभाव और चेतावनी
इस गिरोह के पकड़े जाने से यह साफ हो गया है कि नशा माफिया अब आधुनिक तकनीकों और परिवहन के साधनों का उपयोग कर रहा है। पुलिस ने आम जनता और खासकर युवाओं के अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। रायपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति जारी रहेगी और इस चेन से जुड़े हर व्यक्ति को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

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